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गोसाईगंज सीट: क्या सपा छोड़कर फंस गए हैं बाहुबली अभय सिंह? पुरानी अदावत का तोड़ अब ढूंढे नहीं मिल रहा!


Gosainganj Assembly Seat: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'बाहुबल' और 'सियासत' का चोली-दामन का साथ रहा है. अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. यहां की राजनीति दो धुरंधरों अभय सिंह और इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी के इर्द-गिर्द घूमती है. दिलचस्प मोड़ यह है कि जो कल तक एक-दूसरे के धुर विरोधी थे, आज वे दोनों ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमे में नजर आ रहे हैं. 

अभय सिंह का 'भगवा' प्रेम

समाजवादी पार्टी से विधायक रहे अभय सिंह ने राज्यसभा चुनाव के दौरान पाला बदला और अब वे पूरी तरह से भाजपा के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं. हालांकि आधिकारिक रूप से उन्होंने अभी भाजपा जॉइन नहीं की है, लेकिन उनके क्षेत्र में भाजपा अध्यक्ष के स्वागत में बुलडोजर और मंच की सजावट उनकी भविष्य की योजना को साफ कर रही है. 

टिकट की जंग और खब्बू तिवारी

गोसाईगंज सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी. तब से यहां का मुकाबला दिलचस्प रहा है:

2012: अभय सिंह जीते.

2017: खब्बू तिवारी (भाजपा) ने अभय सिंह को हराया.

2022: अभय सिंह (सपा) ने खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी को हराया.

अब सवाल यह है कि अगर अभय सिंह भाजपा से टिकट मांगते हैं, तो खब्बू तिवारी का क्या होगा? भाजपा जिलाध्यक्ष का कहना है कि पार्टी नेतृत्व कार्यकर्ताओं के मूल्यांकन के आधार पर ही फैसला लेगा.

जातीय समीकरण: किसका पलड़ा भारी?

गोसाईगंज में जातीय गणित जीत-हार तय करता है. मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर जातियों को लेकर इस सीट पर कुछ ऐसी अनुमानित तस्वीर बनती है- 

दलित: 75,000

ब्राह्मण: 65,000

ओबीसी (कुर्मी, निषाद, अन्य): 80,000

यादव/मुस्लिम/ठाकुर:  करीब 25,000 प्रत्येक

स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर अभय सिंह का ठाकुर वोट और खब्बू तिवारी का ब्राह्मण वोट भाजपा के साथ जुड़ जाता है, तो समाजवादी पार्टी के लिए यहां वापसी करनी मुश्किल हो जाएगी. पर सवाल यह है कि बीजेपी यहां से इन दोनों नेताओं में किसे तवज्जो देगी? 

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