आज का यूपी: आशुतोष महाराज के लैपटॉप और सीडी वाले दावों की निकली हवा… कोर्ट से राहत मिलने के बाद अब क्या करेंगे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
UP Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी हलचलों का सटीक विश्लेषण करता है. आज के अंक में हम उत्तर प्रदेश की तीन बड़ी और महत्वपूर्ण खबरों पर विस्तार से चर्चा करेंगे. पहली खबर में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली उस बड़ी राहत का विश्लेषण है जिसने पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है.दूसरी खबर इस कानूनी लड़ाई में आशुतोष महाराज की उन चूकों की है जिसकी वजह से उनके दावे अदालत में टिक नहीं सके. वहीं तीसरी खबर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आगामी 11 मार्च के 'लखनऊ कूच' और सरकार के खिलाफ उनके कड़े रुख पर केंद्रित है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को हाईकोर्ट से बड़ी राहत: गिरफ्तारी पर लगी रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक बड़ी राहत देते हुए मार्च के तीसरे हफ्ते तक उनकी गिरफ्तारी पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामले में जस्टिस जे.के. सिन्हा की पीठ ने करीब सवा घंटे तक चली लंबी बहस के बाद यह फैसला सुनाया. हालांकि यह राहत अभी अस्थायी है, लेकिन इसे स्वामी के समर्थकों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है. कोर्ट अब मार्च के तीसरे सप्ताह में तय करेगा कि उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर अंतिम फैसला क्या होगा.
आशुतोष महाराज के दावों की हवा निकली: साक्ष्यों की कमी पड़ी भारी
इस पूरे मामले में आशुतोष महाराज की भूमिका और उनके द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों पर भी गंभीर सवाल उठे हैं. आशुतोष महाराज लगातार एक लैपटॉप और कथित सीडी का हवाला देकर स्वामी के खिलाफ गंभीर साक्ष्य होने का दावा कर रहे थे. लेकिन अदालत में वे कोई भी ठोस प्रमाण रखने में विफल रहे. मेडिकल रिपोर्ट में भी देरी और अस्पष्टता पाई गई, जिसका लाभ स्वामी के पक्ष को मिला। सरकारी वकील ने भी माना कि पीड़ित बताए जा रहे लड़के स्वामी के गुरुकुल के छात्र नहीं थे, जिससे आरोपों की बुनियाद कमजोर पड़ गई.
'लखनऊ कूच' की तैयारी: क्या 11 मार्च को घेरी जाएगी सरकार?
अदालती राहत मिलने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों का उत्साह दोगुना हो गया है. वाराणसी के मठ से लेकर प्रयागराज की गलियों तक वकीलों और भक्तों ने 'सत्य की जीत' के नारे लगाए. अब सबकी नजरें 11 मार्च पर टिकी हैं, जब स्वामी ने लखनऊ कूच करने और गौ-हत्या के खिलाफ आंदोलन शुरू करने का ऐलान कर रखा है. गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्वामी अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लखनऊ पहुंचकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे या कोर्ट की अगली सुनवाई का इंतजार करेंगे.
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