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23 दिनों तक नाबालिग का गैंगरेप किया… खाने में दो सिर्फ दो रोटी देते थे, कमरे में बंद कर करते थे दरिंदगी; अब मिली उम्रकैद की सजा

 

Bihar Gangrape : बिहार के जमुई जिले में गैंगरेप के एक जघन्य मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने मंगलवार को ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने तीनों आरोपी दोषियों को अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, प्रत्येक आरोपी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला विशेष पॉक्सो एक्ट के तहत सुनाया गया है, जो नाबालिग के साथ किए गए अपराधों के लिए कठोर सजा का प्रावधान करता है।

यह मामला बीते साल दिसंबर 2025 का है, जब 15 वर्षीय नाबालिग लड़की अलीगंज बाजार से अचानक लापता हो गई थी। लगभग 23 दिन बाद, 24 दिसंबर 2025 को पुलिस ने उसे कटिहार के एक कमरे में बेहोशी की हालत में बरामद किया। पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि, 1 दिसंबर को, उसे तीन व्यक्तियों ने कार में किडनैप कर लिया था। उसके बाद, वह तीनों आरोपियों ने लगातार 23 दिन तक उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने यह भी बताया कि उन्हें खाने में केवल दो रोटी ही दी जाती थी, जिससे वह कमजोर हो गई थी।

मोहम्मद इमरान उर्फ चांद, मोहम्मद आफताब अंसारी और मोहम्मद सद्दाम हुसैन इस मामले के मुख्य आरोपी हैं। पुलिस ने आरोपियों को कटिहार से गिरफ्तार किया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी उसे अलीगंज से ले गए और उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया। साथ ही, आरोपी इमरान ने धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया तो उसकी हत्या कर दी जाएगी। पीड़िता ने यह भी कहा कि आरोपी ने उसकी मां को धमकी भरे फोन भी किए, जिसमें कहा गया कि उसकी बेटी वापस नहीं आएगी।

पुलिस ने 17 जनवरी 2026 को आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद, 22 जनवरी को अदालत ने इस मामले को संज्ञान में लिया। गवाहों की सूची तैयार कर, विशेष लोक अभियोजक मनोज शर्मा द्वारा गवाही शुरू की गई। पीड़िता, उसकी मां, डॉक्टर नम्रता सिन्हा, पुलिस अधिकारी और स्कूल प्रिंसिपल सहित कई गवाहों ने बयान दर्ज कराए, जिससे मामले की मजबूत आधारशिला बनी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिला प्रशासन एवं पुलिस ने संयुक्त रूप से स्पीडी ट्रायल की अपील की। फिर, 19 फरवरी से 28 फरवरी तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस के बाद, 16 मार्च 2026 को विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

24 मार्च 2026 को, विशेष पॉक्सो कोर्ट ने तीनों दोषियों को कठोर सजा सुनाई। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137 (2) और 96 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धाराओं 6 और 17 के तहत सजा निर्धारित की। इन धाराओं में अधिकतम मृत्युदंड का प्रावधान है, जबकि न्यूनतम सजा 20 वर्ष या फिर उम्रभर कैद है। अदालत ने इस पूरे प्रकरण में न्याय व्यवस्था की तत्परता और निर्णय की तेजी को समाज में संदेश के रूप में देखा है।

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