स्कूल में बच्चों ने की मारपीट… निलंबित हो गए दारागो समेत 3 पुलिसकर्मी, आगरा में किशोर न्याय अधिनियम का उलंघन का मामला

आगरा के शास्त्रीपुरम स्थित DPS स्कूल में छात्र मारपीट मामले में किशोर न्याय अधिनियम का पालन न करने पर पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सिकंदरा थाने के एक दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि थाने के इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
डीपीएस स्कूल में कक्षा 10 के दो छात्रों के बीच विवाद के दौरान एक छात्र ने दूसरे पर नुकीले पंच से हमला कर दिया था। इस हमले में छात्र विश्वराज के चार दांत टूट गए और उसके जबड़े में गंभीर चोट आई।
घायल छात्र के पिता पीयूष मल्होत्रा, जो एक यूट्यूबर हैं, ने घटना के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट साझा कर स्कूल प्रबंधन और आरोपी छात्र पर कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद मामला चर्चा में आया।
पुलिस कार्रवाई में हुई गलती
पुलिस ने घायल छात्र के पिता की तहरीर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) और 117(2) के तहत मामला दर्ज किया था और नाबालिग आरोपी को हिरासत में लेकर अदालत के बजाय सीधे किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया।
जबकि नियमों के अनुसार आरोपी की उम्र 16 वर्ष से कम होने के कारण उसके खिलाफ नियमित आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए था, बल्कि केवल सामान्य डायरी (जीडी) में प्रविष्टि कर उसे सीधे किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश करना था।
तीन पुलिसकर्मी निलंबित, इंस्पेक्टर पर जांच
मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद डीसीपी सिटी सैय्यद अली अब्बास ने सख्त कार्रवाई की।
- दारोगा मानपाल सिंह निलंबित
- मुख्य आरक्षी कमल चंदेल निलंबित
- आरक्षी सन्नी धामा निलंबित
- इंस्पेक्टर सिकंदरा प्रदीप कुमार त्रिपाठी पर विभागीय जांच के आदेश
इसके साथ ही आरोपी छात्र के खिलाफ दर्ज मुकदमा भी रद्द कर दिया गया है।
स्कूल प्रबंधन का पक्ष
स्कूल प्रशासन ने बयान जारी कर बताया कि दोनों छात्रों के बीच पहले बहस हुई थी, जिसके बाद मारपीट हुई। स्कूल के अनुसार CCTV फुटेज में भी यह घटना कैद है।
प्रबंधन ने कहा कि घायल छात्र को तुरंत स्कूल के चिकित्सक द्वारा प्राथमिक उपचार दिया गया था।
किशोर न्याय कानून क्या कहता है?
किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार:
- 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे पर सामान्य आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता
- ऐसे मामलों में जीडी में प्रविष्टि कर सीधे किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाता है
- बोर्ड ही आगे की कार्रवाई तय करता है
प्रशासनिक सख्ती और संदेश
अधिकारियों का कहना है कि किशोर न्याय अधिनियम का पालन न करना गंभीर लापरवाही है और इसी वजह से तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई है।
आगरा DPS स्कूल मारपीट मामला अब केवल छात्र विवाद नहीं रहा, बल्कि पुलिस प्रक्रिया में हुई गंभीर चूक के कारण प्रशासनिक कार्रवाई का बड़ा मामला बन गया है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है और आगे किशोर न्याय बोर्ड के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई तय होगी।
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