8 रुपए में गुजार देती थीं पूरा दिन, भूख लगने पर पी लेती थीं पानी, नुसरत भरूचा का संघर्ष भरा सफर

बॉलीवुड में अपनी अदाकारी और बोल्ड किरदारों से पहचान बनाने वाली नुसरत भरूचा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। 'प्यार का पंचनामा' से शुरू हुआ उनका सफर आज 'छोरी 2' तक पहुंच चुका है। लेकिन चमक-धमक वाली इस दुनिया के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी है, जो आंखों में आंसू और दिल में हिम्मत भर देती है।
बीते दिनों एक इंटरव्यू में नुसरत ने अपने उन दिनों को याद किया था जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे। नुसरत ने बताया था कि उनका बचपन बहुत सुख-सुविधाओं में बीता था, लेकिन कॉलेज आते-आते स्थितियां बदल गईं। उनके पिता को बिजनेस में बड़ा धोखा मिला, जिसके चलते परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजरने लगा।

नुसरत ने कहा था, पापा मुझे पैसे देना चाहते थे, लेकिन मेरी चेतना मुझे गवाही नहीं देती थी कि मैं उन पर और बोझ डालूं। जुहू में रहने वाली नुसरत को साउथ मुंबई के जय हिंद कॉलेज जाना होता था। नुसरत ने बताया था कि उन्होंने अपने कॉलेज लाइफ का 90% समय रोजाना सिर्फ 8 रुपए खर्च करके निकाला है।
पूरा दिन कॉलेज में रहने के दौरान नुसरत कुछ भी नहीं खाती थीं। जय हिंद कॉलेज में पीने का पानी मुफ्त था। नुसरत बताती हैं कि जब भी उन्हें तेज भूख लगती, वह पेट भरकर पानी पी लेती थीं ताकि पेट भरा हुआ महसूस हो।

अक्सर कॉलेज लाइफ में दोस्त बाहर खाने-पीने का प्लान बनाते हैं। नुसरत के साथ भी ऐसा ही होता था। लेकिन पैसे न होने के बावजूद उन्होंने कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। जब उनके दोस्त रेस्तरां में खाना ऑर्डर करते, तो नुसरत चतुराई से खुद को बचा लेती थीं। वह सिर्फ पानी पीती थीं और किसी को भनक भी नहीं लगने देती थीं कि वह भूखी हैं।
आज नुसरत एक सफल अभिनेत्री हैं, लेकिन वह आज भी फाइनेंशियल प्लानिंग को लेकर बहुत गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अब 70 साल के हैं, मां 62 की और दादी 92 साल की हैं। पूरा परिवार उन पर निर्भर है। नुसरत कहती हैं, मैं कोई सुपरवुमन नहीं हूं, मुझे डर लगता है। मैं अपनी जरूरतों के बाद जो भी पैसा बचता है, उसे तुरंत निवेश और सेविंग्स में डाल देती हूं। मुझे एक बैकअप की जरूरत है, क्योंकि कल क्या होगा किसी को नहीं पता।

आउटसाइडर होकर भी बनाई खास जगह
नुसरत भरूचा की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के मुंबई आते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आपमें अनुशासन और अपने परिवार के प्रति समर्पण है, तो आप 8 रुपये से करोड़ों के सफर तक पहुंच सकते हैं।
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