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लाहुल के राशेल गांव के किसानों की मेहनत को सलाम, बर्फ का पहाड़ चीरकर खेतों तक पहुंचाया पानी

दुर्गम परिस्थितियों में भी खेती की उम्मीद को जिंदा रखे हुए यहां के किसान एक बार फिर अपनी मेहनत और हौसले से मिसाल पेश कर रहे हैं। जिला के राशेल गांव में ग्रामीणों ने करीब सात से दस फुट ऊंची बर्फ और ग्लेशियर के मलबे को चीरकर खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाया। रविवार को गांव के लोग एकजुट होकर करीब 200 मीटर लंबे हिस्से में जमी बर्फ को काटते नजर आए। 

तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने सिंचाई कूहल को साफ कर पानी का प्रवाह बहाल किया। 14 घरों की छोटी सी आबादी वाला यह गांव हर साल ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना करता है, लेकिन हिम्मत नहीं हारता। ग्रामीण इंद्रजीत भानू के अनुसार इस सर्दी में भारी बर्फबारी के चलते ग्लेशियर का मलबा कूहल पर आ गिरा था, जिससे सिंचाई पूरी तरह बाधित हो गई थी। जैसे ही खेती का सीजन शुरू हुआ।

ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभालते हुए रास्ता साफ किया। जोबरंग पंचायत के पूर्व प्रधान सोम देव योकी बताते हैं कि लाहुल घाटी में वर्षा बहुत कम होती है, इसलिए यहां की खेती पूरी तरह सिंचाई पर निर्भर है। हर साल बर्फबारी के बाद पहाड़ों से गिरने वाला ग्लेशियर का मलबा कूहलों को नुकसान पहुंचाता है, जिसे हटाना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता। बावजूद इसके लाहुल के किसान अपने जज्बे और मेहनत से हर मुश्किल को पार कर रहे हैं।

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