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सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश क्यों रोका गया? सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा- परंपरा पर आधारित है नियम, लिंग भेदभाव पर नहीं

Supreme Court : केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया है कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश रोकना कोई लिंग भेदभाव नहीं है, बल्कि यह धार्मिक रीति-रिवाजों और भगवान अयप्पा के ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ स्वरूप पर आधारित परंपरा है।

केरलम में मौजूद इस प्रसिद्ध मंदिर को लेकर केंद्र ने अपने लिखित जवाब में कहा कि पूजा की जगह में कौन प्रवेश कर सकता है, यह मामला धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़ा है, और इसे केवल लिंग के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकार ने अपने जवाब में आगे कहा कि, “यह प्रतिबंध भगवान अयप्पा के ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ होने के स्वरूप के कारण है, न कि किसी अपवित्रता या हीनता की भावना के कारण।” साथ ही, सरकार ने यह भी चेतावनी दी कि यदि इस परंपरा को बदला जाता है, तो इससे मंदिर की पूजा-पद्धति का मूल स्वरूप ही बदल जाएगा और इससे धार्मिक बहुलवाद कमजोर पड़ेगा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वह केरलम के सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को कायम रखा जाए। उन्होंने तर्क दिया कि यह मामला पूरी तरह से धार्मिक आस्था और स्वायत्तता का विषय है, और इसे न्यायालय के विवेकाधीन क्षेत्र में नहीं आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की समीक्षा का अर्थ यह नहीं है कि कोर्ट धार्मिक परंपराओं को तर्क, आधुनिकता या वैज्ञानिकता के आधार पर परखे, क्योंकि यह संवैधानिक समीक्षा के दायरे से बाहर है।

केंद्र का तर्क है कि किसी धार्मिक प्रथा की समीक्षा करना संवैधानिक सीमा से बाहर है और यह अदालतों का कार्यक्षेत्र नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि न्यायालयों को धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या करने का कोई प्रशिक्षण नहीं है और न ही उनके पास ऐसे संसाधन हैं जिनसे वे धार्मिक सवालों पर निर्णय ले सकें।

यह बयान उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट में 2018 के अपने फैसले के खिलाफ लंबित पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई होनी थी। इन याचिकाओं में कहा गया था कि सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए। केंद्र का यह रुख इस विवादित मुद्दे पर सरकार का स्पष्ट समर्थन दर्शाता है और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण को प्राथमिकता देने का संकेत देता है।

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