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ईरान-इजरायल युद्ध से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ठप, क्या थम जाएंगे वाहनों के पहिए?

नई दिल्ली: रसोई गैस (LPG) की किल्लत और आसमान छूती कीमतों के बीच अब आम आदमी की जेब पर एक और बड़ा प्रहार होने वाला है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने अब भारत की गैस सप्लाई चेन को हिला कर रख दिया है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के कारण देशभर में घरों में इस्तेमाल होने वाली पीएनजी (PNG) और वाहनों की लाइफलाइन मानी जाने वाली सीएनजी (CNG) पर संकट के बादल गहरा गए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसी भारत की ऊर्जा सुरक्षा

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश नेचुरल गैस लिक्विफाइड फॉर्म (LNG) में आयात करता है, जो टैंकरों के जरिए इसी समुद्री रास्ते से होकर भारत पहुंचता है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा कतर के दो एलएनजी टैंकरों को रोके जाने की खबर ने वैश्विक बाजार में हड़कंप मचा दिया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक समझौते के तहत इन्हें गुजरने की अनुमति दी गई थी, लेकिन शिप-ट्रैकिंग डेटा बताते हैं कि सोमवार तक ये जहाज संयुक्त अरब अमीरात के तट पर ही खड़े थे। अगर ये टैंकर रास्ता पार नहीं कर पाते हैं, तो भारत के एलएनजी टर्मिनल्स पर स्टॉक खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएगा।

कतर से सप्लाई बंद, इंश्योरेंस का भी संकट

युद्ध के चलते कतर ने मार्च 2026 से अपना एक्सपोर्ट काफी हद तक रोक दिया है। हालात इतने खराब हैं कि होर्मुज से गुजरने वाले टैंकरों का बीमा (Insurance Coverage) मिलना भी लगभग नामुमकिन हो गया है। जानकारों का कहना है कि 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध ने न केवल हजारों जानें ली हैं, बल्कि कच्चे तेल और गैस की कीमतों को ‘चक्रव्यूह’ में फंसा दिया है। भारत के लिए एकमात्र राहत की बात यह है कि ईरान ने उसे अपने ‘मित्र देशों’ की सूची में रखा है, जिससे भारतीय जहाजों को मार्ग मिलने की उम्मीद है, लेकिन कतर से होने वाली मुख्य सप्लाई अभी भी बाधित है।

इंडस्ट्री में कटौती शुरू, घरों पर भी पड़ेगा असर?

सप्लाई में आ रही कमी को देखते हुए भारत सरकार ने सीएनजी और पीएनजी को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। घरों और पेट्रोल पंपों को 100 प्रतिशत सप्लाई सुनिश्चित करने का वादा किया गया है, लेकिन इसका खामियाजा इंडस्ट्री और कमर्शियल यूजर्स को भुगतना पड़ रहा है। गुजरात गैस और जीएसपीसी जैसी दिग्गज कंपनियां पहले ही इंडस्ट्रियल कस्टमर्स की सप्लाई में 20 से 70 प्रतिशत तक की कटौती कर चुकी हैं।

भंडारण की कमी बन सकती है बड़ी मुसीबत

बाजार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि भारत की सबसे बड़ी कमजोरी गैस स्टोरेज (भंडारण) की कमी है। अगर ईरान-इजरायल युद्ध लंबा खिंचता है, तो प्राथमिकता वाले सेक्टर यानी घरेलू रसोई और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी इस संकट की चपेट में आ सकते हैं। फिलहाल सप्लाई पूरी तरह ठप नहीं हुई है, लेकिन होर्मुज के रास्ते पर निर्भरता भारत के लिए रातोंरात बड़ा संकट पैदा कर सकती है।

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