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ईरान ने निभाई दोस्ती तो रूस खुलकर आया सामने, अमेरिका के आगे रख दी तीन शर्तें; अब घुटने टेकेंगे ट्रंप.

 

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच हालात और जटिल हो गए हैं। युद्धविराम जैसी स्थिति के बावजूद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची का रूस दौरा इस पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे रहा है।

अमेरिका के सामने ईरान की तीन अहम शर्तें

ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए अमेरिका के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं-

  • तत्काल युद्धविराम को आगे बढ़ाया जाए
  • होर्मुज से अमेरिकी प्रतिबंध और ब्लॉकेड हटाए जाएं
  • परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा फिलहाल टाली जाए

ईरान का कहना है कि इन शर्तों पर सहमति बनने के बाद ही वह समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने पर विचार करेगा।

ट्रंप प्रशासन मंथन में

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव पर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ चर्चा कर रहे हैं। व्हाइट हाउस की ओर से संकेत मिला है कि अमेरिका अब बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ने को तैयार दिख रहा है, हालांकि आधिकारिक रुख अभी स्पष्ट नहीं है।

रूस के साथ बैठक से बदली रणनीति

रूस की राजधानी मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद ईरान के रुख में सख्ती देखी जा रही है। अरागची ने कहा कि पिछली वार्ताओं में प्रगति हुई थी, लेकिन अमेरिका की “ज्यादा मांगों” के कारण समझौता नहीं हो पाया। उन्होंने बातचीत विफल होने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया।

होर्मुज पर सख्त रुख

ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहीम अज़ीज़ी ने संकेत दिए हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और सख्त किया जा सकता है। प्रस्तावित कानून के तहत इस अहम समुद्री मार्ग की जिम्मेदारी सीधे सेना को देने की तैयारी है। साथ ही, यहां से गुजरने वाले जहाजों पर कड़े नियम लागू करने और शुल्क ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ में लेने का प्रस्ताव भी सामने आया है।

वैश्विक असर की आशंका

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में भारी उछाल और आपूर्ति संकट पैदा हो सकता है।

क्या बढ़ेगा टकराव या निकलेगा समाधान?

फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी ओर सैन्य और राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका ईरान की शर्तें मानकर तनाव कम करेगा या फिर यह टकराव बड़े संघर्ष में बदल सकता है।

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