‘मोबाइल को कुछ न हो… चाहे जान चली जाए’, नदी में डूब रहा था युवक, एक हाथ में फोन लेकर तैरता रहा

MP : मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक 25 वर्षीय युवक की मौत उसकी मोबाइल को पानी से बचाने की कोशिश में हो गई। यह घटना उस वक्त हुई जब सोमवार दोपहर पुलिस की दबिश के दौरान नर्मदा नदी में कूदे युवक मानक वर्मा की डूबने से मौत हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 6 सेकंड के वीडियो ने इस हादसे का दर्दनाक सच बयां कर दिया है।
वीडियो में एक हाथ में मोबाइल लिए तैरता दिख रहा युवक
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मानक नदी की लहरों के बीच संघर्ष कर रहा है। वह एक हाथ से पानी में तैर रहा है और दूसरे हाथ से अपने कीमती मोबाइल को बचाने की कोशिश कर रहा है। नदी की तेज लहरों में भी वह अपने मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए हाथ ऊपर उठाए हुए है, ताकि वह भीग कर खराब न हो जाए। आसपास खड़े पुलिसकर्मी उसे अंदर आने को कह रहे हैं, लेकिन वह अपने बचाव के लिए संघर्ष करता रहा।
मानक ने कुछ महीने पहले ही 15 हजार रुपये का मोबाइल फाइनेंस पर खरीदा था। उसकी 2000 रुपये की मासिक किश्त बड़ी मुश्किल से चुक रही थी। मोबाइल उसकी न केवल बात करने का जरिया था, बल्कि उसकी मेहनत की कमाई और जीवन यापन का साधन भी। मोबाइल को पानी से बचाने की उसकी कोशिश उसकी जान पर भारी पड़ गई।
मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो गुस्साए ग्रामीणों ने जबलपुर-मंडला रोड पर एकता चौक पर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने मानव श्रृंखला बनाकर दो घंटे तक रास्ता रोका। परिजनों का आरोप है कि पुलिस और खनिज विभाग बड़े रेत माफियाओं से मिलीभगत कर गरीबों को प्रताड़ित कर रही है।
यह सब तब हुआ जब सोमवार को एसडीएम और पुलिस की संयुक्त टीम जमतरा घाट पर पहुंची। मानक को पुलिस ने पकड़ लिया था और उसकी कस्टडी में ले लिया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मानक ने प्यास लगने का बहाना किया, जैसे ही एसआई सीएस मरावी ने उसे पानी पीने की अनुमति दी, उसने मौका देख नदी की तरफ दौड़ लगाई और छलांग लगा दी।
मानक अपने बूढ़े माता-पिता का इकलौता सहारा था। घर में डेढ़ साल का बच्चा और गर्भवती पत्नी है। दो महीने पहले ही उसने शहर में मजदूरी छूटने के बाद नदी से रेत निकालने का काम शुरू किया था, जिसमें उसे 20 रुपये प्रति बोरी मिलते थे।
उस दिन पुलिस की गिरफ्त से बचने का डर और मोबाइल की चिंता उसकी जान पर भारी पड़ गई। करीब 10 मिनट तक वह एक हाथ से तैरता रहा, लेकिन अंत में थकान और सांस फूलने की वजह से वह गहरे पानी में डूब गया।
शव मिलने के बाद, परिजनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। तनाव के मद्देनजर एसडीएम मोनिका सिंह और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को आश्वासन दिया कि घटना की उच्च स्तरीय जांच होगी और पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये आर्थिक सहायता, 5 लाख रुपये मुख्यमंत्री सहायता कोष से, बीपीएल कार्ड और मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम में, जिला खनिज अधिकारी एके राय ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनके विभाग की कोई टीम उस समय उस क्षेत्र में मौजूद नहीं थी और वे दूसरे इलाके में जांच कर रहे थे।
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