फेंकने के बजाय लगाया ‘मक्खनी’ जुगाड़ और बन गया ‘बटर चिकन’, नेहरू से लेकर न्यूयॉर्क तक जिसने मचाया धमाल…जानिए बटर चिकन के जन्म की असली कहानी

Butter Chicken History: बटर चिकन आज दुनिया भर में पसंद की जाने वाली डिश है, लेकिन इसकी शुरुआत किसी शाही रसोई में नहीं, बल्कि एक साधारण जुगाड़ से हुई थी। नेशनल जियोग्राफिक के अनुसार, इस डिश का इतिहास 1940 के दशक के पेशावर (जो अब पाकिस्तान में है) और बाद में दिल्ली के दरियागंज से जुड़ा हुआ है।
इस स्वादिष्ट व्यंजन को पहली बार बनाने का श्रेय कुंदन लाल गुजराल को जाता है, जिन्होंने 1920 के दशक में पेशावर में ‘मोती महल’ नाम से रेस्टोरेंट शुरू किया था। 1947 के बंटवारे के बाद वे दिल्ली आ गए और दरियागंज में भी मोती महल रेस्टोरेंट की शुरुआत की।
उनके रेस्टोरेंट में तंदूरी चिकन काफी लोकप्रिय था, लेकिन एक समस्या थी—तंदूर से निकलने के बाद अगर चिकन तुरंत न बिके तो वह सूखकर सख्त हो जाता था। ग्राहकों को सूखा चिकन परोसना उन्हें पसंद नहीं था।
इसी समस्या का हल निकालते हुए कुंदन लाल गुजराल ने एक नया प्रयोग किया। उन्होंने टमाटर, मक्खन, क्रीम और मसालों की समृद्ध ग्रेवी तैयार की और उसमें तंदूरी चिकन के टुकड़े डाल दिए। इससे सूखा चिकन फिर से नरम और रसदार हो गया। ऊपर से मक्खन मिलाने से इसका स्वाद और भी बढ़ गया और इसी तरह बटर चिकन का जन्म हुआ।
धीरे-धीरे यह डिश लोगों की पसंद बन गई और मोती महल की पहचान बन गई। कहा जाता है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर कई विदेशी नेताओं ने भी इसका स्वाद चखा था।
आज बटर चिकन सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क, लंदन और दुनिया के कई देशों के रेस्तरां मेन्यू का अहम हिस्सा बन चुका है। एक छोटे से जुगाड़ से शुरू हुई यह डिश अब भारतीय खाने की वैश्विक पहचान बन गई है।
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