कुंवारी लड़की लाओ, बेटा दौड़ने लगेगा…’ तांत्रिक की बातों में आकर मां ने उजाड़ दी अपनी ही गोद
बीमार बेटे को ठीक करने का खूनी खेल
यह खौफनाक मामला हजारीबाग के कुसुमभा गांव का है। जांच के दौरान जो सच सामने आया, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। आरोपी मां रेशमी देवी (35 वर्ष) अपने छोटे बेटे की शारीरिक और मानसिक बीमारी को लेकर काफी समय से परेशान थी। इसी बीच वह गांव की एक तांत्रिक महिला शांति देवी (55 वर्ष) के संपर्क में आई। तांत्रिक ने रेशमी के मन में यह जहर भर दिया कि अगर वह किसी ‘कुंवारी कन्या’ की बलि देगी, तो उसका बेटा जादुई रूप से पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा। अपने बेटे की जान बचाने के जुनून में अंधी हुई मां ने अपनी ही बेटी की बलि देने की खूनी साजिश रच डाली।
अष्टमी की काली रात और वो भयावह वारदात
वारदात को अंजाम देने के लिए 24 मार्च यानी नवरात्रि की अष्टमी की रात चुनी गई। उस वक्त पूरा गांव रामनवमी के जश्न और मंगला जुलूस में डूबा हुआ था। शोर-शराबे के बीच तांत्रिक शांति देवी के घर पर उस मासूम बच्ची का गला घोंट दिया गया। इस जघन्य अपराध में भीम राम नाम के एक व्यक्ति ने भी उनका साथ दिया। तंत्र-मंत्र के नाम पर बच्ची के साथ बर्बरता की गई और बाद में सबूत मिटाने के लिए उसके शव को एक बगीचे में दफन कर दिया गया।
पुलिस को गुमराह करने की नाकाम कोशिश
हत्या के बाद आरोपियों ने बड़ी चालाकी से मामले को मोड़ देने की कोशिश की। मां ने खुद अपनी बेटी के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी और इसे दुष्कर्म का रूप देने का प्रयास किया ताकि पुलिस का ध्यान भटक जाए। हालांकि, पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने मां के दावों की पोल खोल दी। हजारीबाग एसपी अंजनी अंजन ने बताया कि जब मां और तांत्रिक से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो तीनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
हाईकोर्ट का सख्त रुख और हजारीबाग बंद
इस नरबलि की घटना ने पूरे झारखंड को झकझोर दिया है। झारखंड हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और राज्य प्रशासन सहित डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं, स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। विरोध स्वरूप विपक्षी दल बीजेपी ने सोमवार को हजारीबाग में 12 घंटे का बंद भी रखा था।

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