Recent Posts

Breaking News

‘उसकी… चमड़ी छीलकर डुगडुगी बनाऊंगा’, बंगाल चुनाव के बीच दूसरा हुमायूं कबीर कौन आ गया?.

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक नेता का विवादित बयान सुर्खियों में आ गया है। यह बयान उस वक्त चर्चा में आया जब उन्होंने कहा, “मैं मारूंगा, खाल खींचकर डुगडुगी बनाऊंगा, फिर बजाऊंगा।” यह बयान बंगाल के ही दूसरे हुमायूं कबीर का है, जो राजनीतिक माहौल को और भी गर्मा रहा है।

कौन हैं दूसरे हुमायूं कबीर?

यह हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद के डोमकल से तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। वह कोई आम नेता नहीं हैं, बल्कि एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। उनका नाम बंगाल के पहले हुमायूं कबीर से भी जुड़ा है, जो ममता बनर्जी के साथ लंबे समय से सक्रिय हैं। पहले वाले हुमायूं कबीर भी ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं।

वर्तमान में, दूसरे हुमायूं कबीर ने एक रैली में यह बोलकर राजनीतिक माहौल को गरम कर दिया है। उन्होंने अपने विरोधियों को टारगेट करते हुए कहा, “सीपीआई (एम) और कांग्रेस के लोग यदि हमारे कार्यकर्ताओं को मारेंगे, तो आप उन्हें मत मारना। मुझे फोन करना या वॉट्सएप पर मैसेज कर देना। मैं जाकर इतना मारूंगा कि उसकी खाल खींचकर उसकी डुगडुगी बना दूंगा।”

क्या है यह विवादित बयान?

डुगडुगी एक पारंपरिक वाद्ययंत्र है, जो चमड़े से बना होता है और पुराने समय में मुनादी करने के लिए बजाया जाता था। हुमायूं कबीर का यह बयान काफी विवादित हो गया है। समर्थकों ने इस पर तालियां बजाकर उत्साह दिखाया, लेकिन विपक्ष और कई राजनीतिक दलों ने इसके खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

लेफ्ट और दूसरे दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग से इस बयान को लेकर कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि यह बयान नफरत फैलाने वाला है और चुनावी माहौल को खराब कर सकता है।

दोनों हुमायूं कबीर का इतिहास

पहले वाले हुमायूं कबीर भी ममता बनर्जी के साथ जुड़े हुए हैं। वे एक सख्त पुलिस अधिकारी रह चुके हैं और उनके नाम अपराध पर नकेल कसने के लिए जाना जाता है। मार्च में, जब उन्हें डोमकल से विधानसभा चुनाव का टिकट मिला, तो उन्होंने अपने जीवन को खतरे में बताया था।

वर्तमान में, दूसरे हुमायूं कबीर तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी हैं और चुनावी मैदान में हैं। उनका यह बयान उनकी चुनावी राजनीति को और भी दिलचस्प बना गया है।

राजनीतिक माहौल पर असर

बंगाल चुनाव के बीच इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। विपक्षी दलों ने इसे नफरत फैलाने और हिंसा को उकसावा देने वाला करार दिया है। वहीं, टीएमसी की तरफ से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसकी खूब चर्चा हो रही है।

No comments