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लगातार बैठकर काम करने वाले सावधान! दोपहर के लंच के बाद बस 3 घंटे खड़े होने से 43% कम हो जाएगा ब्लड शुगर

New Delhi : आधुनिक जीवनशैली और ऑफिस में लगातार 8 से 9 घंटे कुर्सी पर बैठे रहने की आदत आपको अनजाने में ही गंभीर बीमारियों की तरफ धकेल रही है। लेकिन हाल ही में हुए एक चौंकाने वाले शोध ने इसका बेहद आसान और असरदार समाधान ढूंढ निकाला है। ताजा रिसर्च में यह बात सामने आई है कि काम के दौरान बीच-बीच में खड़े होकर काम करना ब्लड शुगर (Blood Sugar) को नियंत्रित रखने में अचूक साबित हो सकता है। यही वजह है कि अब कॉरपोरेट वर्ल्ड से लेकर वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों के बीच “स्टैंडिंग डेस्क” (Standing Desk) का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

लगातार बैठे रहने से धीमा पड़ जाता है मेटाबॉलिज्म, बढ़ता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जब आप लगातार कई घंटों तक एक ही जगह बैठे रहते हैं, तो आपके शरीर की शारीरिक गतिविधियां लगभग शून्य हो जाती हैं। इसका सीधा असर आपके मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है, जो बेहद धीमा हो जाता है और इसके कारण खून में ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है। यह स्थिति उन लोगों के लिए बेहद अलार्मिंग और खतरनाक मानी जा रही है, जो पहले से ही प्री-डायबिटीज या टाइप 2 डायबिटीज जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

शोधकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि विशेषकर दोपहर का भोजन (Lunch) करने के बाद लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर ग्लूकोज को सही तरीके से प्रोसेस और इस्तेमाल नहीं कर पाता है। नतीजतन, भोजन के तुरंत बाद ब्लड शुगर का ग्राफ अचानक आसमान छूने लगता है।

लंच के बाद 3 घंटे खड़े होकर काम करने का जादुई असर

इस नए अध्ययन में एक बेहद दिलचस्प और व्यावहारिक प्रयोग किया गया। शोध में पाया गया कि जिन कामकाजी लोगों ने दोपहर का भोजन करने के बाद लगभग तीन घंटे तक खड़े होकर (Standing Position) अपना काम निपटाया, उनके ब्लड शुगर के स्तर में करीब 43 प्रतिशत तक का भारी सुधार दर्ज किया गया। इसके विपरीत, जो लोग लंच करने के बाद लगातार अपनी कुर्सी से चिपके रहे, उनमें शुगर का स्तर काफी बढ़ा हुआ पाया गया। इतना ही नहीं, जिन मरीजों की ब्लड शुगर लंबे समय से अनियंत्रित चल रही थी और दवाओं से भी काबू नहीं आ रही थी, उन्हें भी इस छोटी सी आदत को अपनाने से बेहद सकारात्मक और चमत्कारी परिणाम देखने को मिले हैं।

दोपहर की सुस्ती, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव से मिलेगी मुक्ति

अक्सर कामकाजी लोगों को दोपहर के भोजन के बाद तेज सुस्ती, थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब कुछ शरीर में ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से जुड़ा हो सकता है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से शरीर का एनर्जी लेवल पूरी तरह प्रभावित होता है, जबकि इसके उलट खड़े होकर काम करने से शरीर इंसुलिन का बेहतर और प्रभावी उपयोग कर पाता है।

इससे ब्लड शुगर का स्तर पूरे दिन स्थिर रहता है और आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका सीधा और बेहतरीन असर पड़ता है। रिसर्च यह भी बताती है कि जो लोग दिनभर में कम बैठते हैं, उनमें मानसिक तनाव, एंग्जायटी और घबराहट की समस्या भी बहुत कम देखी गई है।

रीढ़ की हड्डी और गर्दन के दर्द में 54% तक की भारी कमी

लगातार कंप्यूटर के सामने बैठे रहने का दूसरा सबसे बड़ा नुकसान गर्दन, कंधों और पीठ दर्द के रूप में सामने आता है। लगातार एक ही पोश्चर में बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी और आसपास की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है। अध्ययन के आंकड़ों के मुताबिक, खड़े होकर काम करने वाले लोगों में गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से के दर्द में लगभग 54 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है, क्योंकि खड़े रहने से शरीर में हल्की-फुल्ल्की हलचल और ब्लड सर्कुलेशन बना रहता है।

क्या है स्टैंडिंग डेस्क और इसे इस्तेमाल करने का ’50/50 नियम’

बढ़ते चलन के बीच स्टैंडिंग डेस्क एक विशेष प्रकार की टेबल के रूप में उभरी है, जिसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि व्यक्ति उस पर खड़े होकर भी लैपटॉप या कंप्यूटर पर आराम से काम कर सके। आजकल मार्केट में ऑटोमैटिक और एडजस्टेबल स्टैंडिंग डेस्क भी आसानी से उपलब्ध हैं, जिन्हें आप अपनी हाइट और जरूरत के अनुसार कभी भी ऊपर या नीचे कर सकते हैं।

हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह चेतावनी भी देते हैं कि जोश में आकर पूरे दिन लगातार खड़े रहना भी सेहत के लिए सही नहीं है। इसके लिए डॉक्टरों ने ’50/50 नियम’ (50/50 Rule) अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत:

  • हर 30 से 40 मिनट तक बैठकर काम करने के बाद आपको कम से कम 10 से 20 मिनट तक खड़े होकर काम करना चाहिए।
  • खड़े होते समय आपका पोश्चर बिल्कुल सही होना चाहिए और कंप्यूटर स्क्रीन हमेशा आंखों की सीध में होनी चाहिए।
  • पैरों और एड़ियों पर अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए हमेशा आरामदायक और फ्लैट जूते पहनें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि लंबे समय तक बैठे रहने की सिटिंग हैबिट धीरे-धीरे साइलेंट किलर बन सकती है, जो मोटापा, रीढ़ की बीमारी और टाइप 2 डायबिटीज का मुख्य कारण है। अपनी रोजमर्रा की इन छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप इन बड़ी बीमारियों से हमेशा के लिए बच सकते हैं।

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