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50 पहरेदार और हाई-टेक सिक्योरिटी फेल! जैसलमेर का लाडला चूजा कच्छ से हुआ फुर्र, उड़ गई विभाग की नींद.

 

Jaisalmer News:  जैसलमेर और कच्छ क्षेत्र में गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) संरक्षण को लेकर चल रहे प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण की सराहना के कुछ ही दिनों बाद ही एक चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां जंपस्टार्ट तकनीक से जन्मा गोडावण का एक चूजा रहस्यमय तरीके से लापता हो गया है।

26 अप्रैल 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में पीएम मोदी ने गोडावण संरक्षण में हो रही प्रगति का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से इस विलुप्तप्राय प्रजाति की संख्या बढ़ाने के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। इसी कड़ी में कच्छ क्षेत्र में ‘जंपस्टार्ट’ तकनीक को बड़ी सफलता माना जा रहा था।

इस तकनीक के तहत जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क स्थित प्रजनन केंद्र से एक फर्टाइल अंडा लेकर उसे 770 किलोमीटर दूर नलिया (कच्छ) में विशेष पोर्टेबल इनक्यूबेटर में रखा गया था। 26 मार्च 2026 को इस अंडे से चूजे का जन्म हुआ, जिसे संरक्षण अभियान की बड़ी उपलब्धि माना गया था।

चूजे की सुरक्षा के लिए करीब 50 सदस्यीय टीम तैनात की गई थी और पूरे इलाके को हाई सिक्योरिटी जोन घोषित किया गया था। इसके बावजूद 18 अप्रैल के बाद से चूजा अपनी जीपीएस टैग लगी मां के साथ दिखाई नहीं दिया, जिसके बाद उसकी गुमशुदगी की पुष्टि हुई।

वन विभाग को आशंका है कि सुरक्षा में किसी कमजोर कड़ी का फायदा उठाकर कोई शिकारी जानवर जैसे सियार, जंगली बिल्ली या कुत्ता इलाके में घुस आया और चूजे का शिकार कर लिया। हालांकि अब तक कोई अवशेष नहीं मिला है, इसलिए जांच जारी है।

इस घटना ने गोडावण संरक्षण अभियान पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कच्छ क्षेत्र में पहले से ही इस प्रजाति की संख्या बेहद कम रह गई है और वर्तमान में केवल तीन मादा गोडावण ही मौजूद हैं। ऐसे में इस चूजे का लापता होना चिंता को और बढ़ा देता है।

वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि गोडावण जैसे अत्यंत दुर्लभ पक्षी के संरक्षण के लिए और अधिक मजबूत निगरानी और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली की आवश्यकता है।

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