ताड़ीघाट पैसेंजर में डेथ ओवर, कुचमन से चलते ही कनपटी पर मारी गोली, 7KM तक लाश के साथ चले कातिल

चंदौली : उत्तर प्रदेश के चंदौली में रविवार सुबह चलती ट्रेन के भीतर फिल्मी अंदाज में कत्ल की एक ऐसी वारदात हुई, जिसने रेल यात्रियों को दहला कर रख दिया। ताड़ीघाट पैसेंजर में सवार एक युवक की बदमाशों ने कनपटी पर पिस्टल सटाकर सरेआम हत्या कर दी। कलेजा कंपा देने वाली बात यह रही कि हत्या के बाद बदमाश करीब 7 किलोमीटर तक उसी कोच में सवार रहे और सकलडीहा स्टेशन आने से पहले ट्रेन धीमी होते ही कूदकर फरार हो गए।
35 मिनट का सफर और मौत का तांडव
पीडीडीयू जंक्शन (मुगलसराय) के प्लेटफॉर्म नंबर 3 से सुबह 6:24 बजे ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन रवाना हुई थी। कुचमन स्टेशन पर सुबह 6:40 बजे ट्रेन के रुकने तक सब कुछ सामान्य था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही ट्रेन कुचमन से आगे बढ़ी, गाजीपुर निवासी मंगरू 34 का दो युवकों से विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि एक युवक ने जेब से पिस्टल निकाली और मंगरू की कनपटी पर सटाकर ट्रिगर दबा दिया। गोली चलते ही कोच में चीख-पुकार मच गई।

दरियापुर के पास फेंका शव, पिट्ठू बैग लेकर भागे हत्यारे
हत्या के बाद कातिलों ने दरियापुर गांव के समीप चलती ट्रेन से मंगरू के शव को नीचे ट्रैक पर फेंक दिया। इसके बाद भी बदमाश डरे नहीं, बल्कि अगले 7 किलोमीटर तक उसी कोच में बैठे रहे। सहमे हुए यात्रियों के बीच बदमाश अपना पिट्ठू बैग लिए शांत बैठे रहे और जैसे ही ट्रेन सकलडीहा स्टेशन के करीब पहुंची, उसकी रफ्तार कम होते ही वे नीचे कूदकर गलियों में ओझल हो गए। जीआरपी ने मृतक की पहचान चौधरी मोहल्ला, गाजीपुर निवासी मंगरू पुत्र दूधनाथ के रूप में की है।
पुलिस की तीन टीमें और सीसीटीवी खंगालने में जुटे अधिकारी
घटना की सूचना मिलते ही एसपी जीआरपी प्रशांत वर्मा और सीओ सकलडीहा कृष्णमुरारी शर्मा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जीआरपी, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। पुलिस कुचमन से लेकर जमानिया स्टेशन तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। शुरुआती जांच में मामला आपसी रंजिश का लग रहा है।

10 साल पुराना जख्म हुआ ताजा
इस वारदात ने 14 मई 2016 की उस खौफनाक रात की यादें ताजा कर दी हैं, जब बक्सर पैसेंजर में बदमाशों ने दो जीआरपी जवानों को गोली मार दी थी। उस घटना में आरक्षी अभिषेक की मौत हो गई थी। ठीक 10 साल बाद उसी पैटर्न पर हुई इस हत्या ने रेलवे सुरक्षा और सुरक्षा दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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