बैंक मैनेजर को हुआ शक तो बुलाई पुलिस, तलाशी में युवक के पास से निकला कुछ ऐसा कि पुलिस भी चौंक गई.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। यहां चिनहट इलाके में स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक युवक अपने खाते में पैसे जमा कराने पहुंचा। पहली नजर में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन जैसे ही बैंक कर्मचारियों ने नोटों की गिनती शुरू की, उनके कान खड़े हो गए। युवक द्वारा दिए गए पैसों में 500-500 रुपये के 14 नकली नोट बरामद हुए। बैंक मैनेजर को जैसे ही इस बात की भनक लगी, उन्होंने बिना देर किए तुरंत पुलिस को फोन घुमा दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मुस्तैदी दिखाई और बैंक अधिकारी की शिकायत पर आरोपी युवक को तुरंत गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने जब आरोपी की तलाशी ली, तो उनके हाथ बड़ी कामयाबी लगी। आरोपी के पास से कुल 2.35 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। चिनहट के इंस्पेक्टर दिनेश चंद्र मिश्रा के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान सौरभ कुमार शुक्ला के रूप में हुई है, जो मूल रूप से गोंडा के परसपुर स्थित शुक्लनपुरवा का रहने वाला है। पुलिस ने बताया कि आरोपी देवा रोड पर स्थित सिराज कांप्लेक्स की बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में 33 हजार रुपये जमा करने के इरादे से पहुंचा था।
नोटों की जांच में खुला 7 हजार का राज
जब सौरभ ने काउंटर पर कैश दिया, तो कैशियर ने नियमानुसार नोटों की जांच शुरू की। इसी जांच के दौरान मशीन और कर्मचारियों को शक हुआ और देखते ही देखते 500-500 रुपये के 14 नोट यानी कुल 7,000 रुपये नकली पाए गए। इसके बाद शाखा प्रबंधक सुमित सिंह ने तुरंत एक्शन लेते हुए चिनहट कोतवाली में मामले की तहरीर दी। बैंक मैनेजर की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी को अपनी कस्टडी में ले लिया।
हालांकि, जब पुलिस ने आरोपी सौरभ से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि उसे नोटों के नकली होने की कोई जानकारी थी। लेकिन जब पुलिस ने उसकी तलाशी ली और उसके पास से 2.35 लाख रुपये नकद बरामद हुए, तो वह इतनी बड़ी रकम के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। अब पुलिस आरोपी की कुंडली खंगालने में जुट गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर ये नकली नोट कहां से आए? किसके जरिए आरोपी तक पहुंचे? और आरोपी किन-किन संदिग्ध लोगों के संपर्क में है। साथ ही उसकी कमाई के असली जरिया क्या है, इसकी भी जांच की जा रही है।
नकली नोट चलाने वाले बड़े गिरोह से जुड़े तार
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपी सौरभ ने कई ऐसे गोपनीय राज उगले हैं, जिन्हें सुनकर पुलिस अधिकारी भी सतर्क हो गए हैं। पुलिस के मुताबिक, सौरभ किसी छोटे-मोटे गिरोह का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह एक बहुत बड़े रैकेट के लिए काम करता है। इस शातिर गिरोह में उसके जैसे कई और सदस्य भी शामिल हैं, जिन्हें एक खास टास्क दिया जाता है। ये लोग रोजाना अलग-अलग बैंकों की शाखाओं में चार से छह लाख रुपये जमा करने का झांसा देकर पहुंचते हैं।
इस पूरी रकम के बीच में ये लोग बहुत ही चालाकी से 20 से 30 हजार रुपये के नकली नोट खपा देते हैं। गिरोह के निशाने पर ज्यादातर वो बैंक शाखाएं होती हैं, जहां नोटों की बारीकी से जांच नहीं की जाती, जिससे इनका काम आसान हो जाता है। अगर किसी बैंक में मशीन या कर्मचारियों की सतर्कता की वजह से ये पकड़े भी जाते हैं, तो बहुत ही मासूमियत से अनजान बनने का नाटक करते हैं और माफी मांगकर वहां से नौ दो ग्यारह हो जाते हैं। फिलहाल, पुलिस की स्पेशल टीम इस पूरे गिरोह की जड़ों तक पहुंचने के लिए जाल बिछा चुकी है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस रैकेट का एक बहुत बड़ा भंडाफोड़ हो सकता है।

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