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डाक्टर के कॉल पर भी नहीं पहुंची एंबुलेंस…! जहर खाने से मां सहित दो बच्चियों की हुई थी मौत; जांच शुरू

  • शासन ने नजफगढ़ घटना को लिया संज्ञान में, विभागीय टीम हर बिंदु पर करेगी जांच
  • जहर खाने से सरसौल के नजफगढ़ में मां सहित दो बच्चियों की हुई थी मौत।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसौल के चिकित्सक ने 108 को किया था कॉल।

सरसौल,कानपुर। केंद्र हो या फिर प्रदेश सरकार, मरीजों के बेहतर इलाज के लिए चिकित्सा सेवाओं के लाख दावे तो कर रही हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही है। आकस्मिक सेवाओं की स्थिति तो और बदतर है।जिसके कारण गंभीर रूप से बीमार या दुर्घटनाग्रस्त मरीज दम तोड़ रहा है लेकिन आपातकालीन सेवा उसे समय से नहीं मिलती।

आपातकालीन अवस्था में 108 या 102 में कॉल करने से कॉल सेंटर के वर्कर्स औपचारिकता पूर्ण करने जो समय ले रहे उसके कारण आपातकाल सेवा की धज्जियां उड़ रही है। हद तो तब हो जाती कि सरकारी अस्पताल के ही चिकित्सक द्वारा गंभीर रूप के मरीजों या गंभीर रूप से घायलों को उच्च स्तरीय अस्पताल भेजना हो तो चिकित्सक के द्वारा भी 108 पर कॉल करने के बाबजूद सेवा मुहैया नहीं होती, जबकि 108 की एंबुलेंस सेवा अस्पताल पर ही खड़ी होती है और उसका कर्मचारी यह कहता है कि जब तक उसे सेवा प्रदान करने की आईडी नहीं मिलेगी वह सेवा नहीं दे पाएगा।

तो प्रश्न यह उठता है कि किसी की जिंदगी बचाना प्राथमिकता है कि सेवा प्रदाता द्वारा कॉल सेंटर से मिलने वाली अनुमति(आई डी)।बहरहाल कुछ भी हो लेकिन ऐसे ही एक लापरवाही जैसे मामले को स्थानीय समाचार पत्रों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो शासन ने गंभीरता से लिया,फलस्वरूप प्रदेश स्तरीय विभागीय उच्च अधिकारी ने समिति गठित कर जांच शुरू कराई है।

बताते चलें कि कमिश्नरेट कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नजफगढ़ गांव में मंगलवार को एक महिला(चांदनी)ने अपनी दो मासूम बच्चियों (पायल व ब्यूटी)के साथ जहरीला पदार्थ खा लिया था। परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो अचेत हालत में ही तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए डॉयल-108 पर कई फोन किए, लेकिन कोई भी रिस्पांस नहीं मिला। जिसके बाद वह गांव के ही युवक ने तीनों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसौल पहुंचे, जहां तैनात डॉक्टर विशाल कुमार ने डॉयल-108 पर कॉल किया था। बताया तो यह भी जा रहा है कि डाक्टर श्री विशाल को 108 कॉल सेंटर से बात के दौरान अस्पताल में ही एंबुलेंस की सेवा देने वाला वाहन एंबुलेंस खड़ी थी। लेकिन कॉल सेंटर ने जीपीएस सिस्टम के आधार पर उस एम्बुलेंस को लगभग 8 से 10 किलोमीटर दूर बताया गया।काफी जद्दोजहद के बाद करीब एक घंटे बाद एबुलेंस मुहैया कराई गई, जब तक वह हैलट अस्पताल पहुंचे तब तक महिला चांदनी व दो मासूम बच्चियों पायल व ब्यूटी की मौत हो चुकी थी। परिजनों ने कहा कि अगर समय पर वह अस्पताल पहुंच जाती तो शायद उनकी जान बच जाती।

एम्बुलेंस108 सेवा की इस लापरवाही जिससे तीन की मौत हो जाने की खबर को समाचार पत्रों में प्रकाशित कर शासन व विभाग को इस गंभीर लापरवाही जैसी अव्यवस्था से जगाने की कोशिश की।
घटना व आपातकालीन सेवा की प्रमुख खबर को शासन ने गंभीरता से लिया।जिसके बाद
स्वास्थ्य विभाग ने 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा के कामकाज की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसौल पहुंचे एंबुलेंस 108 सेवा प्रदाता कंपनी के मंडल प्रभारी धीरज कुमार ने प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक के अलावा डॉ विशाल कुमार व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसौल के लिए आपातकालीन सेवा देने के लेगी एम्बुलेंस 108 के वर्कर्स से गहनता से पूंछताछ की।उन्होंने बताया कि 108 व 102 एंबुलेंस की सेवा देने में लगे एंबुलेंस(वाहन)कर्मियों को यह बताया गया है कि आपातकालीन समय में सबसे पहले मरीज की जिंदगी को बचाना प्राथमिकता में रखे,और औपचारिकता बाद में पूरी करें।

क्या बोले मुख्य चिकित्सा अधिकारी

इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिदत्त नेमी ने बताया कि 108 एम्बुलेंस सेवा की लापरवाही की जांच के लिए जांच टीम हर बिंदु पर जांच कर रही है।उन्होंने यह भी बताया कि 108 या 102 की एंबुलेंस सेवा प्रदाता द्वारा की जाती है जिसमें स्वास्थ्य विभाग का कोई बंधन नहीं है।ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों व दुर्घटनाग्रस्त लोगों के साथ ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जो चिंतनीय है।

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