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मुश्किल है मुसलमानों के लिए वंदे मातरम्… राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने पर सजा की मंजूरी, ओवैसी की पार्टी में बेचैनी बढ़ी.

 

Vande Matram Controversy : नई दिल्ली में कैबिनेट के एक अहम फैसले के बाद देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने और इसके अपमान पर सजा या जुर्माने का प्रावधान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद राजनीतिक दलों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

वंदे मातरम् को मिला राष्ट्रगान जैसा दर्जा

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया कि ‘वंदे मातरम्’ को अब राष्ट्रगान के समान दर्जा दिया जाएगा। इसके तहत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर भी वही कानूनी कार्रवाई होगी, जो राष्ट्रगान के अपमान पर होती है।

इस फैसले के बाद मौजूदा कानून में संशोधन किया जाएगा, जिसके तहत अपमान करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान लागू होगा।

पहले से मौजूद सख्त कानून

अभी तक राष्ट्रगान के अपमान पर कड़े प्रावधान हैं। अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रगान के दौरान बाधा डालता है या अपमान करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। दोबारा अपराध करने पर सजा और सख्त हो सकती है।

अब यही नियम ‘वंदे मातरम्’ पर भी लागू होने की तैयारी है।

AIMIM नेता वारिस पठान की प्रतिक्रिया

इस फैसले पर AIMIM नेता वारिस पठान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रगान और देश का सम्मान करती है, लेकिन ‘वंदे मातरम्’ की कुछ पंक्तियां मुस्लिम समुदाय के लिए स्वीकार्य नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान के तहत हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है और किसी को भी किसी गीत को गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

वारिस पठान ने यह भी कहा कि जो लोग इसे पूरे दिल से गाना चाहते हैं, वे गा सकते हैं, लेकिन कुछ पंक्तियां धार्मिक दृष्टि से विवादित हैं।

सियासी बहस तेज

इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस तरह के फैसलों से सामाजिक संवेदनशीलता पर असर पड़ सकता है।

कानून में बदलाव की तैयारी

सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को भी राष्ट्रगान के अपमान की तरह ही गंभीर अपराध माना जाएगा। इसके लिए 1971 के कानून में संशोधन किया जाएगा।

फिलहाल इस मुद्दे पर देशभर में चर्चा तेज है और राजनीतिक बयानबाजी लगातार बढ़ती जा रही है।

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