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क्या ट्रायल में देरी पर हाफिज सईद या अजमल कसाब को भी मिल सकती है बेल? SC के फैसले पर दिल्ली पुलिस का सवाल

Delhi : दिल्ली दंगे साजिश मामले में यूएपीए के तहत जेल में बंद तस्लीम अहमद और खालिद सैफी की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान ट्रायल में देरी को आधार बनाकर जमानत देने को लेकर अदालत में अहम बहस हुई।

दिल्ली पुलिस का पक्ष:
दिल्ली पुलिस ने सवाल उठाया कि क्या केवल सुनवाई में देरी के कारण किसी आरोपी को जमानत दी जा सकती है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि गंभीर मामलों में ऐसा करना गलत मिसाल बन सकता है। उन्होंने अजमल कसाब और हाफिज सईद के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि अगर ट्रायल में देरी खुद आरोपी की वजह से हुई है, तो क्या उन्हें भी जमानत मिलनी चाहिए।

बचाव पक्ष का दावा:
खालिद सैफी की ओर से वरिष्ठ वकील रेबेका एम. जॉन ने कहा कि उनके मुवक्किल की भूमिका सीमित है और अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर राहत दी जाए। तस्लीम अहमद की ओर से अधिवक्ता महमूद पराचा ने भी उनकी भूमिका को सीमित बताते हुए जमानत की मांग की।

अदालत का रुख:
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद संकेत दिया कि याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत मिल सकती है। मामले पर अंतिम आदेश शुक्रवार या सोमवार तक जारी किया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि यूएपीए मामलों में ट्रायल में देरी और आरोपी की भूमिका दोनों पर विचार करना जरूरी है और फैसले को बड़े बेंच के पास भेजने पर भी विचार हो सकता है।

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