सूर्या चौहान की हत्या के पीछे सिर्फ बाइक विवाद नहीं, बहन का प्रेम प्रसंग था असली वजह; पिता की शह पर 30 मिनट में कर दिया था काम तमाम

Ghaziabad : दिल्ली से सटे गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र में हुए चर्चित सूर्या चौहान हत्याकांड में एक बेहद चौंकाने वाला और नया मोड़ सामने आया है। पुलिस मुठभेड़ में 50 हजार के इनामी मुख्य आरोपी असद के ढेर होने के बाद अब इस जघन्य कत्ल की असली और खौफनाक वजह सामने आ गई है। पुलिस की शुरुआती जांच में जो मामला महज आधे घंटे पहले हुए एक ‘बाइक विवाद’ की तात्कालिक रंजिश का लग रहा था, उसकी जड़ें दरअसल महीनों पुरानी दुश्मनी और ‘प्रेम प्रसंग’ से जुड़ी हुई थीं। असद की बहन के साथ सूर्या के संबंधों को लेकर आरोपी परिवार लंबे समय से खार खाए बैठा था, जिसे उन्होंने इज्जत का सवाल बनाकर सूर्या को मौत के घाट उतार दिया।
महज आधे घंटे में रची गई कत्ल की पटकथा
पुलिस रिकॉर्ड और चश्मदीदों के मुताबिक, वारदात वाले दिन दोपहर करीब 3:00 बजे रास्ते में बाइक आमने-सामने आ जाने और साइड देने को लेकर असद और सूर्या के बीच तीखी बहस और गाली-गलौज हुई थी। उस वक्त स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर दोनों को शांत करा दिया था। लेकिन यह शांति सिर्फ एक दिखावा थी। इस मामूली विवाद ने असद के भीतर सुलग रही पुरानी आग में घी का काम किया। महज आधे घंटे बाद, यानी दोपहर 3:30 बजे, असद ने अपने पिता नवाब और दोस्तों के साथ मिलकर नवनीत विहार की गली नंबर-4 में सूर्या को घेर लिया। दोस्त फरहान ने असद को चाकू थमाया और पिता नवाब ने उकसाते हुए चिल्लाकर कहा ‘आज इसकी कहानी खत्म कर दे।’ पिता की शह मिलते ही असद ने सूर्या के पेट और सीने में ताबड़तोड़ चाकू घोंपकर उसे मौत की नींद सुला दिया।
मामूली विवाद के पीछे छिपा था ‘ऑनर किलिंग’ का एंगल, 8 महीने पहले बदला था घर
ऊपरी तौर पर यह हत्या भले ही आधे घंटे पहले हुए सड़क के झगड़े का नतीजा दिख रही हो, लेकिन वारदात की असली कहानी बहुत गहरी है। पारिवारिक सूत्रों और सोशल मीडिया पर आए इनपुट के मुताबिक, इस पूरी रंजिश के पीछे सूर्या चौहान का मुख्य आरोपी असद की सगी बहन के साथ प्रेम प्रसंग था।
विवाद की पृष्ठभूमि: सूर्या और असद का परिवार पहले एक ही गली में रहता था। इस प्रेम प्रसंग की बात सामने आने के बाद दोनों पक्षों में कई बार गंभीर झगड़े हुए थे। सामाजिक लोक-लाज और इस विवाद से तंग आकर करीब 8 महीने पहले ही असद के परिवार ने उस गली को छोड़ दिया था और दूसरी जगह रहने चले गए थे। इसके बावजूद सूर्या ने वहां भी आना-जाना और चक्कर काटना बंद नहीं किया था। यही वजह थी कि ईद के दिन हुए बाइक के मामूली विवाद को असद के परिवार ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया और सूर्या की जान ले ली।
भारी सुरक्षा के बीच गोपनीय तरीके से दफनाया गया असद का शव
रविवार सुबह पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में मारे गए 50 हजार के इनामी मुख्य कातिल असद का पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने उसका शव परिजनों (चाचा) को सौंप दिया। कानून व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस की भारी मौजूदगी में बेहद गोपनीय तरीके से असद का अंतिम संस्कार (दफीना) कराया गया। माहौल न बिगड़े, इसलिए पुलिस अधिकारियों ने उस कब्रिस्तान के नाम का खुलासा करने से साफ इनकार कर दिया है, जहां असद के शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया है।
बाकियों का भी हो एनकाउंटर, घर पर चले बुलडोजर बिलखती मां की चीख
इकलौते बेटे को खोने वाली सूर्या की मां सरोज का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने अत्यंत आक्रोशित होते हुए न्याय की गुहार लगाई और कहा:
सात लोगों ने मिलकर कसाई की तरह मेरे बेटे को काटा है। अभी तो पुलिस की गोली से सिर्फ एक पापी मरा है। मेरी मांग है कि बाकी बचे आरोपियों का भी ऐसा ही एनकाउंटर होना चाहिए और उन सबके घरों पर सरकार का बुलडोजर चलना चाहिए। उन्होंने मेरे घर का इकलौता चिराग बुझा दिया, उन्हें जीने का कोई हक नहीं है।
पीड़ित मां की इस मार्मिक चीख के बाद स्थानीय निवासियों ने भी कानून व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए मांग की है कि फरार आरोपियों की संपत्ति को कुर्क कर उनके अवैध मकानों को जमींदोज किया जाए। खोड़ा पुलिस अन्य फरार चल रहे आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
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