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आदि कैलाश-ओम पर्वत यात्रा ने रचा नया इतिहास, दो माह में 50 हजार से अधिक श्रद्धालु गए

पिथौरागढ़। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा इस वर्ष आस्था और पर्यटन के नए आयाम स्थापित कर रही है। यात्रा सीजन शुरू होने के लगभग दो महीने के अंदर ही 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश के दर्शन कर लिये हैं। चारधाम यात्रा की तरह ही कुमाऊं मंडल के उच्च हिमालई क्षेत्र में में आदि कैलाश-ओम पर्वत का संचालन किया जा रहा है। 

पिछले महीने 01 मई को बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर आदि कैलाश धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन के अनुसार 27 जून तक कुल 51,271 इनर लाइन परमिट का आंकड़ा पार हो चुका है। यानी इतने श्रद्धालु अभी तक आदि कैलाश के दर्शन के लिये जा चुके हैं। 26 जून को एक ही दिन में 808 इनर लाइन परमिट जारी किए गए।

इसके साथ ही वर्ष 2026 में तक जारी कुल 51,271 इनर लाइन परमिट का आंकड़ा पार हो चुका है। यह संख्या पिछले वर्ष के पूरे यात्रा सत्र के मुकाबले कहीं अधिक है और यात्रा की लगातार बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है। पिछले वर्ष पूरे यात्रा सीजन में 36256 श्रद्धालु आदि कैलाश गये थे। 

जिलाधिकारी आशीष भटगाईं के अनुसार आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु, पर्यटक, ट्रेकर और प्रकृति प्रेमी बड़ी संख्या में पिथौरागढ़ पहुंच रहे हैं। बेहतर सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं का विस्तार, सरल ऑनलाइन परमिट व्यवस्था तथा जिला प्रशासन की सुव्यवस्थित तैयारियों ने यात्रा को पहले से अधिक सुगम बनाया है। 

जानकारों का भी मानना है कि वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे, वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जोलिंगकोंग योग कार्यक्रम तथा आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन जैसे आयोजनों ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। इसका सकारात्मक प्रभाव यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या के रूप में सामने आ रहा है। यह स्थिति तब है जबकि आदि कैलाश यात्रा पर जाने के लिए इनर लाइन परमिट आवश्यक है। बिना परमिट के कोई भी श्रद्धालु उच्च हिमालई क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकता है।

जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने कहा कि यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह है। जिला प्रशासन यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहा है। यात्रियों की रिकॉर्ड आमद से सीमांत जनपद की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। होमस्टे, होटल, परिवहन, स्थानीय व्यापार, हस्तशिल्प और स्वरोजगार से जुड़े लोगों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।

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