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रिलायंस मेटा के साथ मिलकर जामनगर में बनाएगी AI-सक्षम डेटा सेंटर

मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज अमरीका की दिग्गज टेक कंपनी मेटा के साथ मिलकर गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाला डेटा सेंटर बनाएगी। मेटा के पास फेसबुक, मैसेंजर, इंस्टाग्राम तथा व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया ऐप का स्वामित्व है, और 140 करोड़ से अधिक की आबादी वाला भारत उसके लिए बहुत बड़ा बाजार है। 

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि दोनों कंपनियों के बीच हुई साझेदारी के तहत देश में विशेष तौर पर मेटा के लिए पहले डेटा सेंटर का निर्माण किया जायेगा। निर्माण कार्य दो साल में पूरा होने की उम्मीद है। भविष्य में इसकी क्षमता 168 मेगावाट से आगे बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है।

समझौते के तहत मेटा इस डेटा सेंटर से लीज पर क्षमता लेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज डेटा सेंटर के पूरे जीवनचक्र के लिए आद्यांत सेवा प्रदान करेगी। इसमें डिजाइन और निर्माण से लेकर यूटिलिटीज का प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी और पूर्ण रूप से प्रबंधित परिचालन सेवाएं शामिल हैं। यह डेटा सेंटर मेटा की वैश्विक अवसंरचना का हिस्सा होगा और उसके मुख्य व्यवसाय तथा एआई कंप्यूटिंग की आवश्यकताओं को समर्थन प्रदान करेगा। 

प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि जामनगर में निर्माण क्षमता, नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता, जल संसाधन, भारत के पश्चिमी समुद्री केबल लैंडिंग स्टेशनों की निकटता और जियो के व्यापक फाइबर नेटवर्क तक पहुंच जैसे कारक इसे डेटा सेंटर के लिए रणनीतिक रूप से उपयुक्त स्थान बनाते हैं। यह डेटा सेंटर नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होगा तथा इसे ठंडा रखने के लिए समुद्र के पानी को मीठे पानी में बदलने की प्रक्रिया अपनायी जायेगी, जिससे दोहरा लाभ होगा।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने मेटा के साथ इस साझेदारी को देश के डिजिटल अवसंरचना क्षेत्र में एक ‘परिवर्तनकारी क्षण’ बताया। उन्होंने कहा कि मेटा जैसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी के लिए भारत का पहला बिल्ट-टू-सूट (विशेष रूप से उसके लिए) डेटा सेंटर बनाना इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक एआई क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। 

मेटा के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क ज़ुकरबर्ग ने कहा कि जामनगर स्थित यह विश्वस्तरीय सुविधा मेटा की वैश्विक एआई अवसंरचना के विस्तार में सहायक होगी। साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था में कंपनी के दीर्घकालिक निवेश को और मजबूत बनाएगी।

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