सुप्रीम कोर्ट का धर्मशाला के जज की याचिका पर सुनवाई से इनकार, जानिए क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश के एक न्यायिक अधिकारी की रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अधिकारी ने हाई कोर्ट में पदोन्नति के लिए अपने नाम पर विचार करने की मांग की थी। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि हाई कोर्ट कॉलेजियम को कोई न्यायिक निर्देश नहीं दिया जा सकता।
याचिकाकर्ता अरविंद मल्होत्रा, जो अभी धर्मशाला में फैमिली कोर्ट के प्रिंसीपल जज हैं, की शिकायत थी कि हाई कोर्ट कॉलेजियम ने प्रोमाशन के लिए उनके जूनियर्स के नाम आगे बढ़ाए, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंज़ूरी दे दी। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट बलबीर सिंह ने तर्क दिया कि सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट कॉलेजियम को याचिकाकर्ता और एक अन्य जज के नामों पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन याचिकाकर्ता के मामले में ऐसा नहीं किया गया।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बैंच ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया। बैंच ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे पता चले कि हाई कोर्ट कॉलेजियम ने याचिकाकर्ता का नाम खारिज कर दिया है।
बलबीर सिंह ने जवाब दिया कि सितंबर 2025 में याचिकाकर्ता को बातचीत के लिए बुलाया गया था और कुछ दस्तावेज़ जमा करने को कहा गया था, लेकिन मई में हाई कोर्ट कॉलेजियम ने उनके जूनियर्स के नाम सुप्रीम कोर्ट को भेज दिए। जब जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि याचिकाकर्ता का नाम अभी खारिज नहीं किया गया है, तो बलबीर सिंह ने कहा कि प्रोमोट होने वाले जजों की दो मौजूदा वैकेंसी के लिए जूनियर्स की सिफारिश की गई है।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कृपया इंतजार करें, देखते हैं कि वहां का कॉलेजियम क्या करता है। हो सकता है कि आपकी उम्मीदवारी खारिज न हो। उन्होंने यह भी ध्यान दिलाया कि याचिकाकर्ता की सेवा के दस साल अभी बाकी हैं और भविष्य में वैकेंसी आएंगी। बैंच ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की सलाह दी।
उच्चतम न्यायालय ने याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता की यह बात रिकॉर्ड की कि याचिकाकर्ता अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई याचिका को आगे नहीं बढ़ाना चाहता था। हालांकि याचिकाकर्ता ने प्रशासनिक पक्ष पर उच्च न्यायालय की सही प्राधिकारी से संपर्क करने या दूसरे न्यायिक उपायों का इस्तेमाल करने की आ•ाादी मांगी। इस बात को रिकार्ड में लेते हुए अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।
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