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तहसील दिवस में खुद को जिंदा साबित करने पहुंचा किसान, जांच के बाद बहाल हुआ नाम

Sarsaul, Kanpur : नरवल तहसील परिसर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया। यहां राजस्व अभिलेखों में मृत घोषित किए जा चुके एक किसान को खुद के जीवित होने का सबूत देने के लिए आलाधिकारियों की चौखट पर गुहार लगानी पड़ी। साल 2014 में हुई एक कथित फर्जी वरासत के खेल के चलते उसकी पूरी कृषि भूमि दूसरे लोगों के नाम दर्ज हो गई थी। ‘दैनिक भास्कर डिजिटल’ द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासनिक जांच हुई। मामला पूरी तरह सही पाए जाने पर प्रशासन ने तत्काल फर्जी वरासत निरस्त कर मूल किसान का नाम दोबारा खतौनी में बहाल कर दिया है।

भू-माफियाओं का खेल: अजनबी महिला को बना दिया पत्नी यशोदानगर निवासी पीड़ित किसान श्रीकांत द्विवेदी ने संपूर्ण समाधान दिवस में अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कटरी डोमनपुर स्थित उनकी पैतृक कृषि भूमि पर राजस्व अभिलेखों में अमित कुमार, नीरज कुमार और सरोज का नाम दर्ज हो चुका था। उनका आरोप था कि भू-माफियाओं और विभागीय सांठगांठ के चलते उन्हें कागजों में मृत दर्शा दिया गया। यही नहीं, सरोज नाम की एक अजनबी महिला को उनकी पत्नी तथा अमित व नीरज को उनका पुत्र दिखाकर पूरी जमीन की वरासत उनके नाम कर दी गई, जबकि इन लोगों से उनका दूर-दूर तक कोई पारिवारिक संबंध नहीं है।

अधिकारियों के चक्कर काटता रहा जिंदा किसान जांच में सामने आया कि यह कूटरचित नामांतरण (दाखिल-खारिज) साल 2014 में ही कर दिया गया था। प्रशासनिक जांच के दौरान वरासत प्रक्रिया में गंभीर जालसाजी और त्रुटियां पाई गईं, जिससे यह साफ हो गया कि किसान श्रीकांत पूरी तरह जीवित हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक अभिलेखों में सुधार नहीं किया गया, जिससे परेशान होकर पीड़ित को अपनी ही जमीन के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़े।

प्रशासन ने सुधारी गलती, लेखपालों में हड़कंप पीड़ित किसान की आवाज बनकर जब मीडिया ने इस गंभीर लापरवाही को प्रमुखता से उजागर किया, तब जाकर कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन हरकत में आया। उपजिलाधिकारी (SDM) विवेक कुमार मिश्रा ने बताया कि शिकायत का त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रकरण का पूरी तरह निस्तारण करा दिया गया है। धोखाधड़ी से की गई फर्जी वरासत को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर मूल किसान श्रीकांत द्विवेदी का नाम राजस्व अभिलेखों में पुनः दर्ज करा दिया गया है, साथ ही उन्हें संशोधित खतौनी की प्रति भी सौंप दी गई है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद तहसील के राजस्व कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।

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