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10 रुपये की चोरी के आरोप में शिक्षकों की पिटाई से सहमी मासूम ने गंवाई जान, कुश्ती के दांव सीख रही थी आयुषी

Muzaffarnagar : पचैंडा कलां में एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। कक्षा चार की छात्रा आयुषी की मात्र 10 रुपये की चोरी के आरोप में शिक्षकों द्वारा कथित तौर पर की गई पिटाई के बाद मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने इस मामले में शिक्षकों के खिलाफ पिटाई और आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

अखाड़े में लड़कों को भी मात देती थी होनहार आयुषी

मृतक मासूम आयुषी के पिता अशोक कुमार का सपना था कि उनकी बेटी पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी आगे बढ़कर देश और परिवार का नाम रोशन करे। घर में बेटा न होने के बावजूद उन्होंने अपनी पांचों बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाने और आगे बढ़ाने का कड़ा संकल्प लिया था। कुश्ती में आयुषी की गहरी रुचि को देखते हुए उसे गांव के ही एक स्थानीय अखाड़े में कुश्ती के दांव-पेंच सीखने के लिए भेजा गया था।

अखाड़ा संचालक और समाजवादी पार्टी के नेता युधिष्ठिर पहलवान ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए साझा किया कि छोटी सी उम्र में ही आयुषी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था। वह अखाड़े में अभ्यास के दौरान अपनी उम्र के कई लड़कों को भी कुश्ती में धूल चटा देती थी और खेल के प्रति उसका समर्पण अद्भुत था।

10 रुपये की चोरी का आरोप और शिक्षकों पर पिटाई का गंभीर आरोप

परिजनों के अनुसार, मासूम आयुषी पर स्कूल में सिर्फ 10 रुपये की चोरी करने का झूठा या मामूली आरोप लगाया गया था। आरोप है कि इसी बात को लेकर विद्यालय के शिक्षकों ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। इस घटना के बाद छात्रा मानसिक रूप से इतनी आहत और सहम गई कि उसकी तबियत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने परिवार की शिकायत पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई करते हुए गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।

पांच बेटियों का गरीब परिवार और संघर्ष भरी जिंदगी

मूल रूप से जिला ललितपुर के चक लालौन गांव के रहने वाले अशोक कुमार अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए मुजफ्फरनगर आए थे। उनके परिवार में पत्नी ज्योति और कुल पांच बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी अंजलि कक्षा नौ में पढ़ती है, अनुष्का कक्षा पांच में, आयुषी कक्षा चार में, अपेक्षा कक्षा दो में और सबसे छोटी बेटी सोमिया बालवाटिका में पढ़ती है।

अशोक कुमार अपनी आर्थिक तंगी के बावजूद अपनी सभी बेटियों को पढ़ाने और उन्हें खेलकूद में आगे बढ़ाने की इच्छा रखते थे। तालाब का काम बंद होने के बाद भी यह परिवार मुजफ्फरनगर में ही रुका हुआ था और पचैंडा कलां में तालाब के पास खाली जमीन पर झोंपड़ीनुमा मकान बनाकर अपना जीवन गुजार रहा था।

मछली पालन के ठेके के जरिए जुड़े थे संपर्क में

अखाड़ा संचालक युधिष्ठिर पहलवान ने जानकारी दी कि कई साल पहले उनके पास मछली पालन का ठेका था, उसी दौरान अशोक का परिवार उनके संपर्क में आया और उनके पास रहने लगा। परिवार की स्थिति को देखते हुए उन्होंने बड़ी बेटी अंजलि को मुजफ्फरनगर के अंकित विहार स्थित अपने मकान में रखकर पढ़ाने की जिम्मेदारी उठाई थी, जबकि बाकी चार बेटियां अपने माता-पिता के साथ पचैंडा कलां में ही रह रही थीं। इस दुखद हादसे ने एक हंसते-खेल्ते परिवार के सारे सपनों को चकनाचूर कर दिया है।

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