गाजियाबाद में सनसनीखेज वारदात: जानी-मानी मनोचिकित्सक डॉ. हेमिका अग्रवाल ने सातवीं' मंजिल से कूदकर दी जान, 18 महीने पहले हुआ था तलाक

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित राजनगर एक्सटेंशन की ऑफिसर सिटी-2 सोसायटी में रविवार देर शाम एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। शहर की जानी-मानी मनोचिकित्सक डॉ. हेमिका अग्रवाल ने सोसाइटी की सातवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। गंभीर रूप से घायल हालत में उन्हें तुरंत नजदीकी यशोदा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतका के पिता डॉ. आरके चंद्रा खुद गाजियाबाद के एक वरिष्ठ और प्रतिष्ठित मनोचिकित्सक हैं, जिनका इस प्रकार अपनी बेटी को खोना पूरे चिकित्सा जगत को स्तब्ध कर गया है।
पिछले कुछ समय से भारी मानसिक तनाव से गुजर रही थीं डॉक्टर हेमिका
मृतका के पिता डॉ. आरके चंद्रा ने पुलिस को दी गई जानकारी में बताया कि उनकी बेटी पिछले कुछ समय से गंभीर मानसिक तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रही थी। इस दुखद घटना के सामने आने के बाद हर किसी के जेहन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि जो डॉक्टर खुद दूसरों को तनाव और डिप्रेशन से बाहर निकालने की सलाह देती थीं, वह खुद इस बीमारी का शिकार कैसे हो गईं। पुलिस फिलहाल इस पूरे मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है।
18 महीने पहले हुआ था तलाक, फ्लैट में अकेली रहती थीं मृतका
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले डॉ. हेमिका अग्रवाल का अपने पति से कानूनी रूप से तलाक हो गया था। इस पारिवारिक और मानसिक उठापटक के बाद से ही वह ऑफिसर सिटी-2 सोसायटी के इस फ्लैट में अकेली रह रही थीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती तौर पर मामला डिप्रेशन और पारिवारिक कारणों से जुड़ा लग रहा है, लेकिन केवल इसके आधार पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक टीम की जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को आधार बनाकर अपनी आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
अंदर से बंद था फ्लैट का दरवाजा, मौके से नहीं मिला कोई सुसाइड नोट
घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने बताया कि मृतका का फ्लैट अंदर से पूरी तरह लॉक था और वह उस समय घर में अकेली थीं। शुरुआती पड़ताल में यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, हालांकि मौके से किसी भी तरह का कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। स्थानीय पुलिस और एसीपी इस मामले में परिजनों के साथ-साथ सोसायटी के अन्य निवासियों के बयान दर्ज कर गहनता से पड़ताल कर रहे हैं।
लोगों को टेंशन फ्री रहने की सलाह देती थीं, निधन से सोसायटी में शोक
सोसायटी के लोगों ने डॉ. हेमिका अग्रवाल के मिलनसार और मददगार स्वभाव को याद करते हुए बताया कि वह बेहद सरल व्यक्तित्व की धनी थीं। वह अक्सर आसपास के लोगों को सकारात्मक और तनावमुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करती थीं। सोसायटी के कई लोग मानसिक परेशानियों या तनाव के दौर में जब उनके पास सलाह लेने पहुंचते थे, तो वह उनसे किसी भी प्रकार का परामर्श शुल्क (कंसल्टेशन फीस) नहीं लेती थीं। उनके अचानक इस तरह दुनिया से चले जाने से पूरी सोसायटी में शोक की लहर दौड़ गई है और हर कोई स्तब्ध है।
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