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सोनिया गांधी की किताब ने छुआ राहुल का दिल, 35 साल पुराने दर्द को याद कर बोले- ‘पापा गर्व कर रहे होंगे’

नई दिल्ली : कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ नवंबर में प्रकाशित होने जा रही है। अमेरिकी प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस की इम्प्रिंट अल्फ्रेड ए. नॉफ के मुताबिक, किताब 10 नवंबर को बाजार में आएगी। हालांकि, भारत में इसके प्रकाशन की तारीख की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

आत्मकथा में सोनिया गांधी अपने इटली के बचपन से लेकर भारत आने, राजीव गांधी से मुलाकात और विवाह, गांधी परिवार में प्रवेश और बाद में राजनीति में आने तक के सफर को अपने नजरिए से पेश करेंगी। किताब में इंदिरा गांधी और संजय गांधी की मौत, राजीव गांधी की हत्या और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग भी शामिल होंगे।

राहुल गांधी ने किताब के प्रकाशन की खबर पर अपनी मां के लिए भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी की मृत्यु के बाद उन्होंने सोनिया गांधी को जीवन की मुश्किल परिस्थितियों का साहस और गरिमा के साथ सामना करते देखा। राहुल ने कहा कि वह और उनकी बहन प्रियंका ही जानते हैं कि उनकी मां ने किन कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने इस बात पर खुशी और गर्व जताया कि सोनिया गांधी की कहानी अब उन लाखों लोगों तक पहुंचेगी, जो उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं।

राहुल गांधी ने अपने पिता राजीव गांधी के जन्मदिन के मौके पर यह संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि उनके पिता ऊपर से सोनिया गांधी की इस उपलब्धि को देखकर गर्व महसूस कर रहे होंगे।

कैम्ब्रिज से शुरू होती है कहानी

प्रकाशक के अनुसार, आत्मकथा की कहानी 1965 के कैम्ब्रिज से शुरू होती है, जहां 19 वर्षीय सोनिया मैनो की मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी। किताब में उनके युद्ध के बाद के इटली में बिताए बचपन और उस प्रेम कहानी का भी जिक्र है, जिसने उन्हें भारत तक पहुंचाया।

भारत आने के बाद सोनिया गांधी ने धीरे-धीरे भारतीय जीवनशैली को अपनाया। किताब में इंदिरा गांधी से उनकी पहली मुलाकात, हिंदी सीखने, साड़ी पहनने और भारतीय खान-पान से परिचित होने जैसे निजी अनुभवों को भी शामिल किया गया है।

सोनिया गांधी ने गांधी परिवार में रहते हुए संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत और इंदिरा गांधी की हत्या जैसी घटनाओं को करीब से देखा। बाद में राजीव गांधी की हत्या ने उनके जीवन को एक और गहरे सदमे से गुजारा।

2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने का फैसला

आत्मकथा में 2004 का वह राजनीतिक दौर भी शामिल है, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत के बाद सोनिया गांधी प्रधानमंत्री पद की प्रमुख दावेदार थीं। हालांकि, उन्होंने यह पद स्वीकार नहीं किया और डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय लिया।

किताब सिर्फ सोनिया गांधी के निजी जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि पिछले करीब छह दशकों में भारत में आए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलावों को भी उनके व्यक्तिगत अनुभवों के जरिए देखने का प्रयास करती है।

सोनिया गांधी ने कहा है कि अपने जीवन के बारे में लिखना उनके लिए आसान नहीं था। उनके मुताबिक, आत्मकथा लिखने का अर्थ उन निजी अनुभवों और भावनाओं को सार्वजनिक करना था, जिन्हें उन्होंने लंबे समय तक अपने भीतर सुरक्षित रखा। उन्होंने कहा कि जीवन में मिले दुख, अपनों को खोने और दिल टूटने के अनुभवों ने अंततः उन्हें सार्वजनिक जीवन और राजनीति की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

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