कसाईनुमा मौत देने वाला वो 'राक्षस', जिसने 8000 मुस्लिमों की करवाई थी हत्या, महिलाओं से बलात्कार के लिए खुलाया रेप हाउस, कहानी रात्को म्लादिच की
आंखों में उसकी खौफ दिखता था, गर्दन मोटी और मुंह से सिर्फ मारने की बातें. 1990 के दशक में उसने कत्लेआम का ऐसा तांडव मचाया कि उसे याद कर आज भी लोग सिहर जाते हैं. खून से लाल सड़कें, कटे अंग और महिलाओं संग क्रूरता के किस्से आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं.हम बात कर रहे हैं मानवता के खिलाफ अपराध के दोषी और बोस्निया के पूर्व सैन्य जनरल रात्को म्लादिच की. उसकी 84 साल की उम्र में गुरुवार को हेग में UN डिटेंशन यूनिट में मौत हो गई. उन्होंने अपनी उम्रकैद की सजा के 15 साल पूरे कर लिए थे.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, उसे साल 2017 में अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने दोषी ठहराया था. बोस्निया का कसाई कहे जाने वाले म्लादिच को इंटरनेशनल कोर्ट ने 8 हजार मुस्लिमों के नरसंहार के जुर्म में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
जुल्म की दास्तां से भरा है इतिहास
1992 से लेकर 1995 के बीच हुए बोस्नियन वॉर में बेरहमी से मुस्लिम पुरुषों की हत्या की गई और हजारों महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ. उसने अपने लोगों से झूठ बोला, उनको बहकाया-भड़काया. नरसंहार को वह 'ग्रेटर सर्बिया' के ऐतिहासिक मकसद को पूरा करने का एक मौका समझता था.
यह एक ऐसा खौफनाक मकसद था, जिसे उसने सोची-समझी क्रूरता के साथ पूरा करने की कोशिश की. इसी वजह से वह यूरोप में हिटलर के 'थर्ड राइख' के बाद हुए सबसे भयानक अत्याचारों के लिए जिम्मेदार माना जाता है.
हालांकि, उसकी कट्टरता ने उसे अपने लोगों के बीच एक हीरो बना दिया था. उसने लोगों से कहा था कि उनके मुस्लिम पड़ोसी सर्ब लोगों को सूली पर चढ़ाने, उन्हें जिंदा जलाने और उनकी आंखें फोड़ने की साजिश रच रहे थे.

कहां से शुरू हुई कहानी
रात्को म्लादिच 12 मार्च 1942 को साराजेवो के पास पहाड़ों में बसे एक छोटे से गांव में पैदा हुआ था. उस समय यह इलाका जर्मनी के कंट्रोल वाले 'इंडिपेंडेंट स्टेट ऑफ क्रोएशिया' का हिस्सा था. हालांकि, वह हमेशा खुद को एक साल छोटा बताता था.
दो साल बाद, नाजी-समर्थक क्रोएशियाई राष्ट्रवादियों के खिसाफ जोसिप ब्रोज टीटो (यूगोस्लाविया के पूर्व राष्ट्रपति) के छापामार सैनिकों (पार्टिसन्स) की तरफ से लड़ते हुए उसके पिता की मौत हो गई. म्लादिच की परवरिश जंग के बाद बने नए यूगोस्लाविया में हुई. कुछ समय तक टिन का काम सीखने के बाद, उसने फौज में जाने का मन बना लिया. 1965 में ऑफिसर स्कूल से अपनी ट्रेनिंग पूरी की. आगे बढ़ने की ललक उसमें हमेशा से थी, लिहाजा सैनिक के तौर पर खुद को साबित करते हुए, वे तेजी से आगे बढ़ा और मैसेडोनिया व कोसोवो में सेना की टुकड़ियों की कमान संभाली.
बहादुरी के मामले में बेपरवाही की हद
बीबीसी के मुताबिक, 1980 में जब टीटो की मौत हुई तो वहां से यूगोस्लाविया के अंत की शुरुआत हो गई. यह हमेशा से विरोधी गुटों और दबी हुई नफरत का एक ऐसा संघ था, जिसमें कभी भी शांति नहीं रही. जून 1991 में, क्रोएशिया ने आजादी का ऐलान किया. उसे फिर से कंट्रोल की कोशिश के लिए म्लादिच को यूगोस्लावियाई सेना के साथ भेजा गया, जहां उसने गजब की बहादुरी दिखाई. कभी-कभी यही बहादुरी बेपरवाही की हद तक पहुंच जाती थी.
वह सैनियों के साथ हमेशा मोर्चे की खाइयों और बारूदी सुरंगों को हटाने के अभियानों का खुद आगे रहता था. उनके सैनिक उसे बहुत मानते थे और उसके प्रति सैनिकों की निष्ठा लगभग धार्मिक श्रद्धा जैसी थी.
जब युद्ध बोस्निया तक फैला, तो उनकी सेना ने अपनी वर्दी बदल ली और अलग हुए 'रिपब्लिका सर्पस्का' का समर्थन करने की कसम खाई. वह मुस्लिम आबादी को हमलावर समझता था और इसे ऑटोमन तुर्कों की ओर से पुराने समय में किए गए कब्जे का नतीजा मानता था.
मुस्लिमों से बढ़ती चली गई नफरत
यहीं से उसकी नफरत बढ़ती चली गई और म्लादिच ने कसम खाई कि वह उस ऐतिहासिक अन्याय को ठीक करेगा, घुसपैठियों को बाहर निकालेगा और फिर अपने सपनों का एक ऐसा देश बनाएगा जो नस्लीय रूप से साफ हो.
इसके बाद बोस्निया की राजधानी साराजेवो की घेराबंदी शुरू हुई. इसकी हिफाजत सर्ब, क्रोएट और बोस्नियाक (बोस्नियाई मुसलमान) लोगों की मिली-जुली सेना कर रही थी. आस-पास की पहाड़ियों पर अपनी सेना तैनात करके की गई यह घेराबंदी 1,425 दिनों तक चली. आधुनिक युद्ध के क्रूर इतिहास में यह किसी शहर की सबसे लंबी घेराबंदी थी. 22 जुलाई 1993 को, वहां के डरे-सहमे लोगों पर लगभग 4,000 गोले बरसाए गए. घेराबंदी खत्म होने तक, गोलाबारी या स्नाइपर की गोली से 13,000 लोग मारे जा चुके थे. शहर की लगभग हर इमारत या तो क्षतिग्रस्त या पूरी तरह तबाह हो गई थी.
''जब तक रुकने का ऑर्डर ना दूं, गोलियां चलाते रहो'
राजधानी के आस-पास के गांवों में बहुत सारे मुस्लिमों को मार दिया गया या जेल कैंप में ले जाया गया. हजारों औरतों के साथ बेरहमी से रेप किया गया. जनरल म्लादिक के हेडक्वार्टर से आई एक खबर में उसका कसाईनुमा रवैया साफ दिख रहा था. उसमें लिखा था, 'जब तक मैं तुम्हें रुकने का ऑर्डर न दूं, तब तक धीरे-धीरे गोली चलाओ. मुस्लिम इलाकों को टारगेट करो. वहां ज्यादा सर्ब नहीं रहते. उन पर तब तक गोली चलाओ जब तक वे पागल होने की कगार पर न पहुंच जाएं.'
अपनी सेना की ताकत का मजा लेते हुए उसने रेडियो से ऑर्डर दिए. मैसेज जानबूझकर बिना लिखे छोड़े गए ताकि उन्हें दुनिया भर में सुनाकर ब्रॉडकास्ट किया जा सके. जब उसके सैनिकों ने एक इलाके पर निशाना साधा, तो वह चिल्लाया-'उनके दिमाग जला दो'. सैनिकों ने उसका आदेश ऐसा माना 'जैसे भगवान ने दिए हों.'

बेटी ने कर ली थी आत्महत्या
रात्को वीकेंड पर अपने परिवार से मिलने जाता था. यहां उसकी पत्नी और दो बच्चे बेलग्रेड में सुरक्षित रहते थे. वे साथ में बोर्ड गेम्स खेलते थे और जान-बूझकर राजनीति पर बात नहीं करता था. लेकिन उनकी 23 साल की बेटी एना को एक युवा डॉक्टर और मानवाधिकार कार्यकर्ता से प्यार हो गया था.
उस डॉक्टर ने उसके सामने एक शर्त रखी कि या तो अपने पिता को छोड़ दो या फिर मुझसे कभी मत मिलना.
प्यार के सपनों और परिवार के रिश्तों के बीच फंसी एना ने डिस्प्ले केस से अपने पिता की पसंदीदा बंदूक निकाली. कुछ ही पल बाद, उसने ट्रिगर दबा दिया. म्लादिच अपनी बेटी की आत्महत्या की बात स्वीकार नहीं कर पा रहा था. इसके बजाय, उसने अजीबोगरीब साजिश की थ्योरीज पर यकीन किया, जिनमें इस त्रासदी के लिए उसने खुद को छोड़कर बाकी सबको दोषी ठहरा दिया.
आखिरकार, 1995 में नाटो का सब्र जवाब दे गया. उसने सारायेवो के आसपास म्लादिच के ठिकानों पर लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइलों से हमले किए, जिनका असर बहुत विनाशकारी रहा.
फिर किया सबसे खौफनाक कत्लेआम
घेराबंदी तो टूट गई, लेकिन देश को 'साफ' करने का उनका खूनी अभियान अभी खत्म नहीं हुआ था. उस गर्मी में, पूर्वी बोस्निया के एक छोटे से पहाड़ी शहर, स्रेब्रेनिका में हजारों बोस्नियाक नागरिक जमा हुए थे. वे संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सुरक्षा में थे, जिसने इसे 'सुरक्षित इलाका' घोषित किया था.
बोस्नियाई सर्ब सैनिकों ने उन पर भारी गोले और रॉकेट बरसाए. 5 दिन बाद, म्लादिच टीवी कैमरा क्रू के साथ शान से शहर में दाखिल हुआ.
शहर के मुख्य चौक पर उसने उसने मिठाइयां बांटीं, बच्चों के सिर थपथपाए और उन्हें भरोसा दिलाया कि सब ठीक हो जाएगा. उन्हें बेवकूफ नहीं बनाया गया.
मुट्ठी भर डच शांति सैनिकों ने कुछ नहीं किया, जबकि आदमियों को गोली मारी जा रही थी और औरतों का रेप किया जा रहा था.
इसके बाद दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद यूरोप की धरती पर सबसे घिनौना काम हुआ.
रात्को के सैनिकों ने हर बोस्नियाक आदमी को पकड़ा, उन्हें दूर-दराज की जगहों पर ले जाया गया और बड़े पैमाने पर उनकी हत्या कर दी.
कुछ ही दिनों में, 8,000 आदमियों और लड़कों की आंखों पर पट्टी बांधकर उनको मौत के घाट उतार दिया गया. उनमें से कुछ बारह साल के थे, दूसरे सत्तर के आस-पास के. उन सभी को बेरहमी से एक साथ, बिना निशान वाली कब्रों में धकेल दिया गया.

रेप हाउस बनाने का दिया था आदेश
म्लादिच इतना बेरहम था कि उसने फोका जिले के कई शहरों में मुस्लिम महिलाओं से रेप के लिए रेप हाउस बनवाए थे. यहां उनकी फौज मुस्लिम महिलाओं को सेक्स स्लेव बनाकर रखती थीं.
यूरोप के इतिहास का एक काला अध्याय
यह एक ऐसा अपराध था, जिसे बहुत सोचे-समझे तरीके से अंजाम दिया गया.लोगों को UN से सुरक्षा का वादा किया गया था और यह सब UN की नाक के नीचे हुआ. बाद में, UN के महासचिव कोफी अन्नान ने लिखा कि इसकी जिम्मेदारी 'सबसे पहले उन लोगों की थी जिन्होंने इस नरसंहार की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया'. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने 'निष्पक्षता की सोच के कारण फैसले लेने में गंभीर गलतियां की थीं'. म्लादिच पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया गया था. अमेरिका ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए 50 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा की. एक साल बाद, बोस्निया की राष्ट्रपति बिलजाना प्लाविसिक ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर उसे पद से हटा दिया.
राष्ट्रपति ने सुरक्षा के लिए बना दी फौज
लेकिन हेग में उन पर मुकदमा चलने में 14 साल लग गए. वह बेलग्रेड लौट आया, जहां उसे राष्ट्रपति स्लोबोदान मिलोसेविच का समर्थन और सुरक्षा मिली. म्लादिच खुलेआम घूमता, दोस्तों के साथ हिरण का शिकार करता, शानदार रेस्टोरेंट में खाना खाता और यहां तक कि फुटबॉल मैच भी देखने जाता था. वह अपने बहुत से देशवासियों के लिए हीरो था, जो उनमें सर्बियाई लड़ाकू जज्बे और अपने देश के गौरवशाली अतीत की झलक देखते थे. वे उसको किसी अंतरराष्ट्रीय अदालत को सौंपने के लिए तैयार नहीं थे. राष्ट्रपति ने तो म्लादिच की निजी सुरक्षा के लिए एक खास फौज भी बना दी थी.
राष्ट्रपति को कर लिया गिरफ्तार
लेकिन शिकंजा कसना शुरू हुआ अक्टूबर 2000 में. जब स्लोबोदान मिलोसेविच को खुद गिरफ्तार करके हेग भेजा गया, तो मामला गंभीर होने लगा. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का असर दिखने लगा था. भगोड़ों को पनाह देने की वजह से सर्बिया का यूरोपीय संघ में शामिल होना रुका हुआ था. उस रात म्लादिच भाग निकला. उसे अब अपने देश से सुरक्षा की गारंटी नहीं थी.
अगला दशक उसने एक सुरक्षित ठिकाने से दूसरे ठिकाने पर जाते हुए बिताया. पहले अंगरक्षकों की एक वफादार टीम ने उसकी सुरक्षा की और जब वे कम हो गए, तो उसके परिवार ने यह जिम्मेदारी संभाली.
जुलाई 2008 में, उसके पुराने राजनीतिक साथी राडोवन कराडजिच को बेलग्रेड में एक बस में गिरफ्तार किया गया. सर्बिया की नई सरकार ने उसको इंटरनेशनल कोर्ट को सौंप दिया, जिसके साथ उसने सहयोग का औपचारिक समझौता किया था.
इसके बाद जनरलम्लादिच की बारी थी. तीन साल बाद, वह मिल गया. पुलिस उसके बच्चों का पीछा करते हुए एक दूर-दराज, खस्ताहाल फार्महाउस तक पहुंची, जहां वे बिना किसी साफ वजह के आंगन में अकेले खड़ा था. उनसे मिलने की हिम्मत न जुटा पाने के कारण, म्लादिच खिड़की से सब देख रहा था. जब सुरक्षा बल अंदर गए, तो उन्हें 69 साल का एक बेहाल बुजुर्ग मिला, जिसे कई बार स्ट्रोक आ चुके थे.

मुकदमा चलने में लगे 4 साल
मुकदमा चलने में ही चार साल लग गए. अदालत की कार्यवाही 500 से ज्यादा दिनों तक चली, जिसमें लगभग 600 गवाहों की बात सुनी गई और करीब 10,000 सबूतों की जांच की गई. कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया, हालांकि बहुत कम लोगों को ही इस बात पर शक था कि फैसला क्या होगा. रात को म्लादिच को स्रेब्रेनिका नरसंहार से ठीक पहले अपने सैनिकों को आदेश देते हुए दिखाया गया था. उसको नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और 'जंग के नियमों' के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया. वह मुस्कुराता हुआ और कैमरों की ओर थंब्स-अप करते हुए कोर्टरूम में आया, लेकिन फैसले सुनते ही गुस्से से भड़क उठा और जोर-जोर से 'सब झूठ है' चिल्लाने लगा. इसके बाद जबरदस्ती उसे बाहर ले जाया गया. उसको मिली सजा का मतलब था कि वह जेल में ही मरेगा.
'आखिरकार इंसाफ मिला'
मुकदमे के दौरान मौजूद कई पीड़ितों और उनके रिश्तेदारों में फिक्रेत एलिस भी शामिल थे. वे वही कैदी थे जिनकी 1992 में बोस्नियाई सर्ब कंसंट्रेशन कैंप में बेहद कमजोर और कंकाल जैसी हालत में फिल्म बनाई गई थी. उन्होंने कहा, 'इंसाफ हुआ है. युद्ध अपराधी को दोषी ठहराया गया है.' वहीं, दूसरे लोग बस रो पड़े.

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