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मास्टर ऑफ सोशल वर्क में करियर, समाजसेवा के साथ नाम, प्रतिष्ठा और कमाई के भी अवसर

मास्टर ऑफ सोशल वर्क कोर्स देगा नौकरी के बढिय़ा मौके

आज के समय में युवा परंपरागत कोर्सों को छोडक़र अलग-अलग तरह के कोर्स और क्षेत्र में अपना करियर बना रहे हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में कांपीटिशन कम है और इससे उनको अच्छे भविष्य के अवसर प्राप्त होते हैं। सोशल वर्क आज के समय में सबसे अधिक तेजी से बढऩे वाला करियर विकल्प है। इसमें युवा समाज के लिए एक अच्छा कार्य करने के साथ-साथ अपना एक अच्छा भविष्य भी बना रहे हैं… 

बहुत लोग समाजसेवा करने में रुचि रखते हैं। अगर आप भी उनमें से एक हैं और लोगों की मदद करके अपनी सेवाएं देश के नाम करना चाहते हैं, तो इसे अपना प्रोफेशन भी बना सकते हैं। इसको देखते हुए भारत की कई यूनिवर्सिटीज में मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्लू) की पढ़ाई कराई जाती है। मास्टर डिग्री करने के बाद इस फील्ड को आप अपना पेशा बना सकते हैं। एमएसडब्ल्यू में समाजसेवा से संबंधित अहम विषय की पढ़ाई कराई जाती है, जिसमें सोशलवर्क करने की बारीकियां समझाई जाती हैं। आप इस प्रोफेशन में भरपूर पद, प्रतिष्ठा और पैसा कमा सकते हैं।

यह कोर्स नौकरी और बिजनेस दोनों के मौके देता है। समय को देखते हुए ये करियर का बेहतर ऑप्शन बनता जा रहा है। इसमें नौकरी के अच्छे अवसर उपलब्ध हैं। यह नौकरी आपको अपना नेटवर्क बढ़ाने के मौके भी देती है। सबसे अच्छी बात है कि इस क्षेत्र में रहकर आप समाज के लिए एक बेहतर कल की तैयारी करते हैं और समाज के पिछड़े हुए कुचले वर्ग को मुख्यधारा में लाते हैं। इससे आप मानव कल्याण कार्य में जोड़ते हैं और सबसे बड़ा कार्य हमारा मानव कल्याणकारी होता है इसलिए इस क्षेत्र में सैलरी से ज्यादा क्षेत्र की कार्य की महत्त्वता है।

कोर्स सब्जेक्ट

भारत में एमएसडब्ल्यू कोर्स में आमतौर पर कई तरह के विषय और विशेषज्ञताएं शामिल होती हैं। एमएसडब्ल्यू कोर्स में शामिल कुछ सामान्य विषय और विशेषज्ञताएं इस प्रकार हैं…

मानव व्यवहार और सामाजिक पर्यावरण: यह विषय मानव व्यवहार, सामाजिक पर्यावरण और सामाजिक संस्थाओं सहित सामाजिक कार्य के सिद्धांतों और सिद्धांतों को कवर करता है।

सामाजिक कार्य अभ्यास: यह विषय संचार, परामर्श, मामला प्रबंधन, वकालत और सामुदायिक आयोजन सहित सामाजिक कार्य अभ्यास के कौशल और तकनीकों पर केंद्रित है।

सामाजिक नीति और विकास: यह विषय सामाजिक कल्याण, सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास से संबंधित नीतियों और कार्यक्रमों को कवर करता है।

अनुसंधान पद्धतियां और सांख्यिकी: यह विषय सामाजिक कार्य अनुसंधान में प्रयुक्त पद्धतियों और तकनीकों को कवर करता है, जिसमें मात्रात्मक और गुणात्मक अनुसंधान पद्धतियां, डाटा विश्लेषण और सांख्यिकी शामिल हैं।

सामुदायिक विकास: यह विषय सामुदायिक विकास के सिद्धांतों और प्रथाओं पर केंद्रित है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी, सशक्तिकरण और क्षमता निर्माण शामिल है।

लिंग और विकास: यह विशेषज्ञता लिंग संबंधी मुद्दों और सामाजिक विकास पर उनके प्रभाव को कवर करती है, जिसमें लिंग असमानता, भेदभाव और लिंग आधारित हिंसा शामिल है।

स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य: यह विशेषज्ञता स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों और सामाजिक विकास पर उनके प्रभाव पर केंद्रित है, जिसमें स्वास्थ्य देखभाल नीतियां, कार्यक्रम और मानसिक स्वास्थ्य शामिल हैं।

ग्रामीण एवं जनजातीय विकास: यह विशेषज्ञता भारत में ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों के समक्ष आने वाली समस्याओं एवं चुनौतियों पर केंद्रित है, जिनमें गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक बहिष्कार शामिल हैं।

सैलरी पैकेज

कोर्स को करने के बाद आप शुरुआत में औसतन 20000 से लेकर 35000 रुपए तक के सैलरी में काम कर सकते हैं। जैसे-जैसे इससे अनुभव बढ़ता है, आपकी सैलरी भी बढ़ सकती है। इसमें पार्ट टाइम और फुल टाइम दो तरह से वर्क कर सकते हैं। अगर किसी बड़े आर्गेनाइजेशन से जुड़ते हैं तब सालाना सैलरी तीन से चार लाख होती है। पांच से छह साल के अनुभव के बाद सैलरी बढक़र चार से 12 लाख तक पहुंच सकती है। समय और जिम्मेदारी बढऩे पर सैलरी भी बढ़ती जाती है।

योग्यता

अगर ‘मास्टर ऑफ सोशल वर्क’ कोर्स करना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि बैचलर डिग्री भी सोशल वर्क विषय से ही पास करें। इससे ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन दोनों में ही विषय का स्पेशलाइजेशन हो जाता है।

सोशल वर्क में मास्टर करने के लिए आपके पास बैचलर डिग्री होनी चाहिए। इसके साथ ही आपको किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 50 प्रतिशत नंबरों से 12वीं की परीक्षा पास की होनी चाहिए।

जनरल वर्ग के लिए स्नातक में 50 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 45 प्रतिशत अंक होने चाहिए। इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए आयु की कोई सीमा निर्धारित नहीं है। बस ग्रेजुएशन डिग्री होनी जरूरी है।

ऐसे चुनें कामयाबी की राह

– मास्टर इन सोशल वर्क कोर्स करने के लिए आपको बैचलर डिग्री करनी होती है और बैचलर डिग्री कोर्स को करने के लिए आपको सबसे पहले किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं की पढ़ाई करनी होती है, आप अपनी 12वीं के पढ़ाई किसी भी विषय से कर सकते हैं।

-12वीं की पढ़ाई बहुत अच्छे से करनी होती है, क्योंकि आपके 12वीं के अंकों के आधार पर ही आपकी स्नातक डिग्री में दाखिला होता है।

– 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद आपको स्नातक डिग्री का कोर्स करना होता है और इस कोर्स में भी आपके कम से कम 50 फीसदी अंक होने चाहिए, तभी जाकर आप किसी अच्छे कालेज में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के लिए दाखिला ले सकते हैं। इसलिए आप अपने बैचलर डिग्री की पढ़ाई भी बहुत अच्छे से करें, ताकि इसमें आपके अच्छे अंक आ सकें।

करियर स्कोप

कोर्स करने के बाद आपको बहुत अच्छे-अच्छे क्षेत्रों में अच्छी नौकरियां प्राप्त होती हैं। इस कोर्स को करने के बाद विभिन्न प्रकार के एनजीओ तथा सरकार के अलग-अलग विभागों में काम कर सकते हैं। इस कोर्स को करने के बाद आप बहुत तरह के सामाजिक कल्याणकारी समूह के साथ जुडक़र वहां कार्य कर सकते हैं। 

अंतरराष्ट्रीय एनजीओ समूह के साथ जुडक़र विभिन्न पदों पर काम कर सकते हैं जैसे कि यूनिसेफ, यूनेस्को, डब्ल्यूएचओ और हर क्षेत्र में एक लेबर कम्युनिटी होती है, जिसके जरिए आप मजदूरों के हक के लिए लड़ते हैं आप इन सब एनजीओ और समूह में विभिन्न पदों पर कार्य कर सकते हैं। इस क्षेत्र में युवाओं का रुझान बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है

सरकारी क्षेत्र

मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री लेने के बाद रोजगार के सुनहरे अवसर मिलते हैं, क्योंकि इस डिग्री को प्राप्त करने के बाद किसी प्रकार की ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं होती है। डिग्री अपने आप में एक संपूर्ण ट्रेनिंग है। केंद्रीय व राज्य स्वास्थ्य विभाग जेल विभाग काउंसलर, अनुसंधान अधिकारी, पुलिस विभाग में काउंसलर, रेलवे, अनुसंधानकर्ता, बैंक , महिला बाल विकास, न्यायालय, बाल कल्याण विभाग , सरकारी वृद्धा आश्रम, सरकारी स्कूल- कॉलेज, यूनिवर्सिटी आदि मे रोजगार के सुअवसर है।

प्राइवेट सेक्टर

मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्ल्यू) डिग्री धारी सामाजिक कार्यकर्ता एनजीओ में नौकरी पा सकता है, जिसमें आकर्षक वेतन प्राप्त कर सकता है। एक सामाजिक कार्यकर्ता स्वयं का ग्रुप भी रजिस्टर्ड करा कर मानव कल्याण कार्य कर सकता है और अपना करियर बन सकता है। सामाजिक कार्यकर्ता सरकारी प्रोजेक्ट भी लेकर काम कर सकता है। 

एमएसडब्ल्यू डिग्री पास करने के बाद पीएचडी की उपाधि भी प्राप्त की जा सकती है। विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री के पास एमएसडब्ल्यू को नौकरी मिल सकती है। हालांकि यह केवल पांच वर्ष की अवधि तक ही हो सकती है। एमएसडब्ल्यू की डिग्री लेने के बाद महिलाओं को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर सुनहरे अवसर मिलते हैं।

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