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जंतर-मंतर हिंसा : सादे कपड़ों में जवान, हाथों में लाठियां… आखिर क्यों अपनाई गई ये रणनीति? पुलिस ने बताई वजह

नई दिल्ली : दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में इस तैनाती को लेकर अपना पक्ष रखा है। घटना के करीब एक महीने बाद दाखिल हलफनामे में पुलिस ने कहा है कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती जानबूझकर और रणनीति के तहत की गई थी।

दिल्ली पुलिस के उपायुक्त सचिन शर्मा की ओर से दाखिल हलफनामे के मुताबिक, भीड़ को नियंत्रित करने और स्थिति पर नजर रखने के लिए स्पेशल ब्रांच और क्राइम ब्रांच के जवानों को सादे कपड़ों में प्रदर्शनकारियों के बीच तैनात किया गया था। पुलिस ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि बड़े प्रदर्शनों और भीड़ नियंत्रण की परिस्थितियों में पहले भी इस तरह की रणनीति अपनाई जाती रही है।

पुलिस ने सादे कपड़ों में तैनाती को बताया रणनीति

पुलिस का कहना है कि सादे कपड़ों में जवानों की मौजूदगी का उद्देश्य भीड़ के बीच होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना और संभावित हिंसा या अव्यवस्था की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना था। पुलिस ने अदालत को बताया कि इस तरह की तैनाती कोई असामान्य प्रक्रिया नहीं है और भीड़ नियंत्रण के दौरान इसका इस्तेमाल पहले भी किया जाता रहा है।

प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद जवानों के लाठीचार्ज के वीडियो सामने आने के बाद उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। शिकायतें मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंचीं। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में भी इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया था कि सादे कपड़ों में तैनात जवानों की कार्रवाई से स्थिति और बिगड़ी।

करीब 200 प्रदर्शनकारी और 250 पुलिसकर्मी घायल

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान करीब 200 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। वहीं, लगभग 250 पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी बात कही गई है। पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरत पड़ने पर लाठीचार्ज करना अपने आप में गलत नहीं है।

पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर कील लगी लाठी के इस्तेमाल को लेकर भी सफाई दी। पुलिस के अनुसार, ऐसी लाठी का इस्तेमाल केवल एक स्थान पर देखा गया था। पुलिस का दावा है कि कील लगी लाठी प्रदर्शनकारियों के हाथ में थी और संभव है कि उसे झंडे के डंडे के रूप में प्रदर्शन में लाया गया हो।

क्यों सादे कपड़ों में तैनात किए जाते हैं पुलिसकर्मी?

प्रदर्शन या बड़े सार्वजनिक आयोजनों में पुलिस की ओर से कई बार सादे कपड़ों में जवानों की तैनाती की जाती है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य भीड़ के बीच की गतिविधियों की जानकारी जुटाना और संभावित असामाजिक तत्वों पर नजर रखना होता है।

1. खुफिया जानकारी जुटाना: लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU), स्पेशल ब्रांच या अन्य संबंधित इकाइयों के जवान सादे कपड़ों में भीड़ का हिस्सा बनकर गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। इससे पुलिस को संभावित हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका की जानकारी पहले मिल सकती है।

2. स्थिति को नियंत्रण में रखना: सादे कपड़ों में तैनात जवानों का एक उद्देश्य भीड़ के भीतर चल रही गतिविधियों को समझना और माहौल बिगड़ने की स्थिति में पुलिस के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना होता है। बड़े प्रदर्शनों में यह रणनीति भीड़ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

फिलहाल सादे कपड़ों में पुलिस की तैनाती और प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर विवाद जारी है। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपने हलफनामे के जरिए तैनाती को रणनीतिक कदम बताया है, जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से जवानों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

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