पिज्जा की तरह Online हो रही लड़कियां' डिलीवर, इस गंदी वेबसाइट्स के जरिए ग्राहक चुन रहे अपनी पसंद
इस रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इंटरनेट पर महिलाओं और मासूम बच्चियों का सौदा 'पिज्जा' या किसी 'प्रोडक्ट' की तरह किया जा रहा है। 'पिम्पिंग वेबसाइट्स' के नाम से मशहूर ये प्लेटफॉर्म अब आधुनिक गुलामी का सबसे बड़ा अड्डा बन गए हैं।
खौफनाक सच: 60,000 से ज्यादा विज्ञापनों का जाल
कमिश्नर एलेनोर लियोन ने अपनी जांच में पाया कि ये वेबसाइट्स अपराधियों के लिए सोने की खान साबित हो रही हैं। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं। 12 प्रमुख वेबसाइट्स पर करीब 63,000 विज्ञापनों की जांच की गई जिसमें से 10 में से 6 विज्ञापनों में सीधे तौर पर मानव तस्करी और यौन शोषण के संकेत मिले। केवल एक महीने के भीतर इन 12 वेबसाइट्स पर 4 करोड़ से ज्यादा लोग पहुंचे जो यह दर्शाता है कि यह अवैध धंधा कितनी तेजी से फैल रहा है।
सुपरमार्केट जैसा बर्ताव
एक पीड़िता मिया डे फाओइट ने इसे आधुनिक गुलाम बाजार करार दिया है जहां ग्राहक अपनी पसंद की उम्र और नस्ल के आधार पर महिलाओं को चुनते हैं।
पीड़िताओं की दर्दनाक दास्तां
इस नरक से निकलकर आई महिलाओं की आपबीती सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए:
पहचान के लिए टैटू: एक पीड़िता ने बताया कि उसने अपने शरीर पर टैटू इसलिए बनवाया ताकि अगर उसे मार दिया जाए तो कम से कम उसके शव की पहचान हो सके।
हिंसा का डर: वेबसाइट्स पर अगर कोई महिला किसी ग्राहक से मिलने से इनकार करती है तो उसे बलात्कार और जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं।
बिचौलियों का कब्जा: अपराधी खुद महिलाओं के नाम पर ग्राहकों से चैट करते हैं और सौदा तय करते हैं। सारा मुनाफा बिचौलिए डकार जाते हैं जबकि महिलाएं बेघर और सदमे में रहती हैं।
सरकार का कड़ा रुख: हम इनके पीछे आ रहे हैं
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ब्रिटिश सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां हरकत में आ गई हैं। संसद में ऐसे कानून लाए जा रहे हैं जिससे अदालतों को इन 'पिम्पिंग वेबसाइट्स' को तुरंत सस्पेंड करने का अधिकार मिलेगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि टेक कंपनियों को किसी भी आपत्तिजनक विज्ञापन या बिना सहमति के साझा की गई तस्वीरों को 48 घंटे के भीतर हटाना होगा। अब इन वेबसाइट्स पर उम्र का सत्यापन (Age Verification) अनिवार्य करने की मांग उठ रही है ताकि बच्चों को इस दलदल से बचाया जा सके।
सावधानी ही बचाव है
मानव तस्करी की शिकार महिलाओं की मदद करने वाली संस्था तारा (TARA) का कहना है कि अपराधी अक्सर कमजोर आर्थिक स्थिति वाली महिलाओं को निशाना बनाते हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध 'एस्कॉर्ट सर्विस' या 'मसाज पार्लर' के संदिग्ध विज्ञापनों के पीछे अक्सर एक बड़ा संगठित अपराध छिपा होता है।
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