'जिस स्कूल में मजदूर का बच्चा, उसी में PM का बच्चा पढ़े', आरक्षण पर लड़की की बात सुन कुनिका ने थपथपाई पीठ
हालांकि, बिना अनुमति जुटने के कारण पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। इस बीच सोशल मीडिया पर एक प्रदर्शनकारी लड़की का वीडियो खूब सर्कुलेट हो रहा है, जिसे एक्ट्रेस कुनिका ने भी शेयर किया है। वीडियो में लड़की दो टूक शब्दों में कहती है कि 'हम आरक्षण छोड़ देंगे भईया, लेकिन पहले यह तय हो कि जिस स्कूल में कूड़ा साफ करने वाला बच्चा पढ़ता है, उसी स्कूल में प्रधानमंत्री का भी बच्चा पढ़े। तब जाकर मेरिट और टैलेंट की बात करना।' कुनिका ने इसे शेयर करते हुए लिखा है- जियो बिटिया रानी!
'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकारी नौकरियों, शिक्षा और छात्रवृत्ति में आरक्षण का आधार जाति के बजाय केवल आर्थिक स्थिति (आय) होना चाहिए। UGC के नए इक्विटी नियमों और क्रीमी लेयर के प्रावधानों के साथ ही SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग को रोकने और उसमें बदलाव की भी मांग है। अब इसी बीच जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शनकारी लड़की का इंटरव्यू चर्चा में है। वह 'मेरिट' और 'टैलेंट' पर बेबाकी से बात रखते हुए पूछती है कि पहले 'वन नेशन वन एजुकेशन' लागू हो, वह शौक से आरक्षण छोड़ देंगी।
कुनिका सदानंद ने लिखा- जियो बिटिया रानी
कुनिका ने 'जियो बिटिया रानी' कैप्शन के साथ जो वीडियो शेयर किया है, उसमें लड़की कहती है, 'एक जैसा एजुकेशन करो, उसके बाद तुम्हारी औकात है तो हमसे बराबरी करो मेरिट में, अगर नाप नहीं दिए तुमको तो फिर कहना। आप आईए हमारे साथ उसी खिचड़ी वाले स्कूल में पढ़िए और है औकात तो फिर उसके बाद हम से टैलेंट में बराबरी कीजिए, फिर देखिए कि असली टैलेंट किस में है।'
इस पर रिपोर्टर ने लड़की से सवाल किया कि जो लोग आरक्षण के समर्थक हैं, वो कहते हैं जिसमें टैलेंट है, वो पीछे रह जाता है? इस पर लड़की जवाब देती है, 'बिल्कुल है। हम सहमत हैं उनसे कि उनमें टैलेंट हैं। लेकिन भाई, पिछले तीन हजार साल से जिसका खानदान पढ़ते आ रहा है, उसका IQ लेवल और जिसका मात्र तीन पीढ़ी से पढ़ते आ रहे हैं, उसमें धरती-आसमान का फर्क होगा। इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन जिसके बच्चे अमेरिका और कनाडा में पढ़ रहे हैं और जिसके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ रहे हैं, जिसमें बैठने के लिए बेंच नहीं है और सिर के ऊपर छत चू रहा है, उसकी बराबरी आप कनाडा और जर्मनी में पढ़ने वाले से कहां से करिएगा... पॉसिबल है क्या, पॉसिबल है तो बताइए।'
'वन नेशन वन एजुकेशन लागू हो, कोलेजियम सिस्टम खत्म हो'
'आप आइए और हमारे साथ उसी खिचड़ी वाले स्कूल में पढ़िए.... और है औकात तो फिर उसके बाद हमसे टैलेंट में बराबरी करिए। जो दान रूपी भीख लेकर जीवन चलाते हैं, वो हमें आरक्षण का ज्ञान देंगे। ठीक है कल से, तुम दान लेना बंद कर दो, हम भी छोड़ देंगे आरक्षण, हमको कोई आपत्ति नहीं है, हम तो कह रहे हैं, हम आरक्षण छोड़ देंगे भाईया, बस दो शर्ते हैं हमारी, वन नेशन वन एजुकेशन लागू होना चाहिए। और दूसरा कि कोलेजियम सिस्टम कल के कल खत्म करो, हम आरक्षण छोड़ देंगे। बस शर्त यह होनी चाहिए कि हम जिस विद्यालय में पढ़ते हैं, उसी में तुम्हारे बच्चे भी पढ़ेंगे।'
लड़की ने कहा- सब के लिए एक जैसी शिक्षा की व्यवस्था हो
लड़की आगे कहती है, 'दो ही शर्त है हमारी। पहली- वन नेशन, वन एजुकेशन लागू करवाओ। एक मेस्तर (शौच की सफाई करने वाला) का बेटा जिस स्कूल में पढ़ेगा। उसी स्कूल में एक प्रधानमंत्री का भी बेटा पढ़ेगा। एक कचरा-कूड़ा साफ करने वाला का बेटा जिस स्कूल में पढ़ेगा, उसी स्कूल में दिग्गज बिजनसमैन का बेटा भी पढ़ेगा।'
'हमारे स्कूल में बेंच नहीं, वो अमेरिका में पढ़ते हैं, IQ लेवल में फर्क'
इस पर रिपोर्टर ने यह भी सवाल किया कि जिस तरह कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रर्दशन सफल हुआ था, क्या यह आरक्षण को लेकर प्रदर्शन भी सफल होगा? प्रदर्शनकारी लड़की ने इसका भी दो टूक जवाब दिया। कहा, 'कॉकरोच जनता पार्टी इसलिए बनी थी कि बच्चों का भविष्य सरकार के द्वारा बर्बाद किया जा रहा था। लेकिन ये जो है एक मनुवादी विशेष धर्म-जाति के लोगों के द्वारा की जा रही साजिश है, जिसमें फिर से गरीब को, दलित को, अन्य लोगों को, जिसको आजादी से पहले पढ़ाई लिखाई से वंचित रखा जाता था, जिसको पढ़ने का अधिकार नहीं था, जिसको नौकरी करने का अधिकार नहीं था, जिसको मंदिर में जाने का अधिकार नहीं था, वो फिर से उस चीजों को दोहराने के लिए एक साजिश रची जा रही है और ऐसे भी ये साजिश अब चलने वाला नहीं है। ये देश बाबा साहब अंबेडकर के लिखे संविधान से चलता है, ये देश लोकतंत्र से चलता है।'
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