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गौत्तम अडानी का हुआ था अपहरण, 5 करोड़ की देनी पड़ी थी फिरौती, वरिष्ठ आईपीएस अफसर राजेश पांडेय ने किताब में किया खुलासा

गौत्तम अडानी का हुआ था अपहरण, 5 करोड़ की देनी पड़ी थी फिरौती, वरिष्ठ आईपीएस अफसर राजेश पांडेय ने किताब में किया खुलासा


ई दिल्ली: देश के प्रमुख उद्योगपति गौतम अडानी के करीब 28 साल पुराने अपहरण की घटना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी एवं पूर्व आईजी राजेश पांडेय ने अपनी नई पुस्तक 'अंतहीन' में इस घटना को लेकर कई अहम दावे किए हैं।

एक पॉडकास्ट में उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1998 में गौतम अडानी का अपहरण कुख्यात माफिया बबलू श्रीवास्तव के गिरोह ने किया था और अपहरणकर्ताओं ने खुद को इनकम टैक्स अधिकारी बताया था।

राजेश पांडेय के मुताबिक, यह घटना 1 जनवरी 1998 को अहमदाबाद में हुई थी। गौतम अडानी अपने सहयोगी शांतिलाल पटेल के साथ कर्णावती क्लब से निकल रहे थे। इसी दौरान हथियारबंद लोगों ने उनकी कार को रोका और दोनों को अगवा कर लिया। उपलब्ध पुराने पुलिस रिकॉर्ड आधारित रिपोर्टों में भी अडानी और शांतिलाल पटेल के अपहरण की घटना दर्ज है। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक दोनों को बंदूक की नोक पर अगवा कर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया था।

इनकम टैक्स अधिकारी बनकर पहुंचे थे अपहरणकर्ता

राजेश पांडेय ने पॉडकास्ट में बताया कि अपहरणकर्ताओं के पास इनकम टैक्स विभाग के पहचान-पत्र थे। उन्होंने गौतम अडानी के बारे में जानकारी जुटाई और उन्हें एक फ्लैट में ले जाकर बंधक बनाया गया। पांडेय के मुताबिक, इस पूरी योजना में बबलू श्रीवास्तव गिरोह के लोग शामिल थे। पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान पांडेय ने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने पहले बड़ी रकम की मांग की थी। बातचीत के बाद रकम पांच करोड़ रुपये पर आकर तय हुई। अडानी की ओर से कहा गया कि इतनी बड़ी रकम तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकती और बाजार से धन की व्यवस्था करनी पड़ेगी। राजेश पांडेय के अनुसार, शुक्रवार को रकम का एक हिस्सा उपलब्ध कराया गया, लेकिन शनिवार और रविवार को बैंक बंद होने के कारण बाकी रकम की व्यवस्था में परेशानी आई। उन्होंने बताया कि अपहरणकर्ताओं ने बैंक से रकम निकलवाने की कोशिश भी की, लेकिन तत्काल पैसा नहीं मिल सका।

अडानी के अपहरण की घटना पहले से सार्वजनिक

पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक अडानी और उनके सहयोगी शांतिलाल पटेल को कर्णावती क्लब से निकलने के बाद हथियारबंद लोगों ने अगवा किया था और बाद में दोनों को छोड़ दिया गया था। अडानी ने स्वयं भी वर्षों बाद इस घटना को अपने जीवन की बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में से एक बताया था। 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी 1 जनवरी 1998 की घटना का उल्लेख करते हुए बताया गया था कि कर्णावती क्लब से निकलने के बाद हथियारबंद लोगों ने अडानी और उनके सहयोगी को अगवा किया था। इस मामले में बाद में फजलुर रहमान और भोगीलाल दर्जी समेत आरोपियों के नाम सामने आए थे । मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। 2018 में अहमदाबाद की विशेष अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दोनों आरोपियों को बरी कर दिया था।

बरेली जेल में हुई थी मुलाकात और 'अंतहीन' की कहानियां

राजेश पांडेय ने बताया कि जब वे बरेली में आईजी पद पर तैनात थे, उस दौरान बबलू श्रीवास्तव बरेली सेंट्रल जेल में बंद था। कोरोना काल के दौरान जेल निरीक्षण और बंदियों से बातचीत के क्रम में उनकी बबलू श्रीवास्तव से मुलाकात भी हुई थी । पांडेय के अनुसार, बबलू से बातचीत के दौरान उन्होंने उसके अपराधों और पुराने मामलों के बारे में जानकारी हासिल की। इसी दौरान गौतम अडानी अपहरण मामले से जुड़ी जानकारियों की भी चर्चा हुई। पांडेय का दावा है कि बबलू श्रीवास्तव ने इस घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की थी।

पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय की पुस्तक 'अंतहीन' का उपशीर्षक 'अंडरवर्ल्ड जो केवल रूप बदलता है' । पुस्तक में अपराध, अंडरवर्ल्ड, गैंगस्टरों और पुलिस जांच से जुड़े कई चर्चित मामलों का उल्लेख किया गया है। गौतम अडानी अपहरण से जुड़ा दावा इस समय इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह घटना करीब तीन दशक पुरानी है और अडानी आज देश के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल हैं। वहीं, इस मामले में राजेश पांडेय द्वारा बताए गए कई विवरण उस समय सार्वजनिक हुई पुलिस कार्रवाई से आगे की जानकारी के तौर पर सामने आते हैं।

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