दुल्हन खोजने में मदद करें... सेहरा बांधकर DM ऑफिस पहुंच गया दूल्हा, रख दीं 4 मांगें

मुंबई. शादी के लिए लड़का-लड़की मिलना आमतौर पर परिवार और रिश्तेदारों की जिम्मेदारी मानी जाती है. लेकिन महाराष्ट्र के सोलापुर में एक युवक ने अपनी शादी के लिए सीधे सरकार से मदद मांग डाली.
मामला सोलापुर जिले के मोहोल तालुका के कुरुल गांव का है. यहां 28 वर्षीय किसानदेव दत्तात्रेय नानावरे ने शादी के लिए लड़की नहीं मिलने की समस्या को लेकर अनोखा आंदोलन शुरू किया.
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि युवक सेहरा बांधकर सरकारी दफ्तर पहुंच गया. अब सोशल मीडिया पर भी उसका यह अंदाज चर्चा का विषय बना हुआ है.
युवक सरकारी दफ्तर क्यों पहुंचा?
किसानदेव का कहना है कि वह किसान परिवार से हैं और फिलहाल बेरोजगार हैं. उनके पास करीब आधा एकड़ जमीन है. उसके मुताबिक आज के समय में शादी के लिए ज्यादातर लड़कियां और उनके परिवार ऐसे लड़के को प्राथमिकता देते हैं जो अच्छी तरह पढ़ा-लिखा हो, सरकारी नौकरी में हो या उसकी अच्छी सैलरी हो. ऐसे में छोटे किसान और बेरोजगार युवाओं के लिए शादी करना मुश्किल होता जा रहा है. किसानदेव ने इसी समस्या को उठाने के लिए एक दिवसीय धरना शुरू किया.
क्या है युवक की सबसे बड़ी मांग?
किसानदेव का कहना है प्रशासन और समाज को किसानों तथा बेरोजगार युवाओं की शादी के लिए मदद करनी चाहिए. उनकी मांग है कि सरकार इस समस्या को सिर्फ व्यक्तिगत मामला न मानकर सामाजिक समस्या के तौर पर देखे.
किसानदेव की 4 बड़ी मांगें क्या हैं?
1- दुल्हन खोजने में सरकारी मदद : समाज कल्याण विभाग के माध्यम से सर्वधार्मिक सरकारी विवाह पंजीकरण केंद्र शुरू किया जाए, जहां किसानों और बेरोजगार युवाओं को शादी के लिए योग्य जीवनसाथी खोजने में सहायता मिले.
2- शादी के लिए 1 लाख रुपये: किसानदेव ने मांग की है कि शादी करने वाले युवाओं को 1 लाख रुपये का विवाह अनुदान दिया जाए.
3- घर के लिए 2 लाख रुपये का लोन: शादी के बाद घर बसाने के लिए 2 लाख रुपये का होम लोन उपलब्ध कराया जाए.
4- कारोबार शुरू करने के लिए ब्याज मुक्त लोन: युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 2 लाख रुपये का ब्याज मुक्त और बिना गारंटी वाला ऋण दिया जाए, ताकि वे अपना छोटा कारोबार शुरू कर सकें.
सोशल मीडिया पर क्यों चर्चा में है मामला?
एक तरफ लोग युवक के अंदाज को देखकर कह रहे हैं कि भाई ने शादी के लिए सीधे सरकार को जिम्मेदार बना दिया!दूसरी तरफ यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सरकार वास्तव में लोगों के लिए दुल्हन या दूल्हा खोजने की जिम्मेदारी ले सकती है? सरकार रोजगार, शिक्षा और आर्थिक सहायता की व्यवस्था कर सकती है, लेकिन शादी जैसे निजी फैसले में सरकार की भूमिका कितनी होनी चाहिए, यह अपने आप में बड़ा सवाल है.
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