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'जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं.' 7 साल, 13 बार फेल, 14वें SSB में बने कोस्ट गार्ड ऑफिसर

'जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं.' 7 साल, 13 बार फेल, 14वें SSB में बने कोस्ट गार्ड ऑफिसर


SSB Success Story : "जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं…" हर्ष दुबे के लिए यह महज फिल्मी डायलॉग नहीं है. यह उनके पूरे संघर्ष और हार न मानने के जज्बे की कहानी है. उन्होंने करीब सात साल तक कोशिश की और 13 असफल प्रयास के बाद 14वां SSB क्रैक करके कोस्ट गार्ड में ऑफिसर बने.

20 जून 2025 हर्ष की जिंदगी का वह दिन था, जब उन्हें इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए रिकमेंट किया गया था. इससे पहले की उनकी जर्नी असफलताओं से भरी रही. उन्होंने NDA में पांच, CDS में 6 और CGCAT में एक असफल प्रयास किया. इसके बावजूद उन्होंने लक्ष्य का पीछा नहीं छोड़ा. कहते हैं न कि हर असफलता कुछ न कुछ सिखाती है, तो हर्ष भी हर नाकामियों से कुछ न कुछ सीखते गए और अंतत: मंजिल तक पहुंचने में सफल रहे.

पिता की एक बात ने दिखाई मंजिल

रिपोर्ट के अनुसार, हर्ष ने बताया कि उनके पिता की कही एक बात उनके मन में हमेशा बनी रही. जब वह सातवीं कक्षा में थे, तो पिता ने कहा था कि उनके गांव से अब तक कोई अधिकारी नहीं बना है. उन्हें इस परंपरा को बदलना चाहिए. यही बात हर्ष के लिए प्रेरणा बन गई.

दूसरी तरफ उनके चचेरे भाई BSF में सेवा दे रहे थे. सेना में जाने की इच्छा उन्हें देखकर मजबूत हुई. बाद में NCC ज्वाइन किया तो वहां तय हो गया कि जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद फौजी बनना ही है.

12वीं में झटका, B.Tech ने बदला रास्ता

12वीं कक्षा में उम्मीद मुताबिक मार्क्स नहीं आए तो हर्ष का आत्मविश्वास हिल गया. लेकिन फिर उन्होंने मेहनत की और बीटेक 9.1 CGPA से पास किया. इसके बाद उन्होंने आर्मी के टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स (TGC), SSC Tech और नेवी टेक जैसी एंट्री के जरिए आर्मी ज्वाइन करने की कोशिशें की.

हर्ष याद करते हैं कि 24 जुलाई 2023 को उनका पहला SSB था. वे स्क्रीन इन तो हुए, लेकिन रिकमेंट नहीं हो सके. इसके बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियर की जॉब शुरू कर दी. वहां करीब एक साल काम करने के बाद जनवरी 2025 में उन्होंने लगभग 50 हजार रुपये की नौकरी छोड़ दी और दिल्ली लौटकर पूरी तरह अपने सपने पर ध्यान देना तय किया.

असफलताओं के बाद भी नहीं छोड़ी उम्मीद

नौकरी छोड़कर नए सिरे से तैयारी शुरू करने पर तुरंत सफलता नहीं मिली. उसके बाद तो कई बार स्क्रीन आउट और कॉन्फ्रेंस आउट हुए. इस दौरान उनके मन में यह सवाल भी आया कि कहीं नौकरी छोड़ने का फैसला गलत तो नहीं था. लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी.

कैसे हासिल की सफलता?

असफलताओं को लेकर 14वें प्रयास तक हर्ष का नजरिया बदल चुका था. उन्होंने टाइम मैनेजमेंट आत्मविश्वास, स्पष्ट सोच और GTO में टीम प्लेयर की भूमिका पर खास ध्यान दिया. वे अपने लेक्चर्स के वीडियो रिकॉर्ड करके उसे एनालाइज करते थे, दोस्तों से प्रैक्टिस करते थे और मेंटर्स से लगातार फीडबैक लेते थे. आखिरकार 20 जून 2025 को उनका सपना पूरा हुआ. इंडियन कोस्ट गार्ड में रिकमेंडेशन मिलने के साथ सात साल और 14 प्रयासों का सफर एक नई शुरुआत में बदल गया. 

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