बीमारी पर सवाल, काम का प्रेशर और एक्स्ट्रा वर्क Gen Z महिला ने बताए सीनियर्स के टॉक्सिक बिहेवियर

आजकल सोशल मीडिया पर ऑफिस की कल्चर और वर्कप्लेस के माहौल को लेकर काफी चर्चा होती रहती है. खासकर Gen Z के कर्मचारी अपने अनुभवों को खुलकर शेयर करते हैं. खराब मैनेजमेंट, जरूरत से ज्यादा काम, पर्सनल लाइफ में दखल और सीनियर्स के बिहेवियर जैसे मुद्दों पर युवा कर्मचारी अक्सर अपनी राय रखते नजर आते हैं.
ऐसे ही एक मामले में इंस्टाग्राम पर मिताली शर्मा नाम की एक महिला ने वीडियो शेयर किया. उन्होंने दावा किया कि Gen Z आने वाले समय में बेहतर बॉस साबित हो सकता है, क्योंकि इस पीढ़ी ने खुद कई ऐसे अनुभव झेले हैं, जिन्हें वह अपने कर्मचारियों के साथ दोहराना नहीं चाहेगी. मिताली ने अपने वीडियो में अपने पुराने ऑफिस एक्सपीरियंस के बारे में बात की और कुछ ऐसी घटनाएं बताईं, जिन्हें उन्होंने सीनियर्स की छोटी-छोटी लेकिन परेशान करने वाली हरकतें बताया.
Gen Z बनेगे बेहतर बॉस?
उनका कहना था कि इन अनुभवों ने उन्हें यह समझने में मदद की कि जब कभी वह खुद किसी टीम या कंपनी की जिम्मेदारी संभालेंगी, तो किस तरह का व्यवहार नहीं करना है. मिताली ने बताया कि एक बार जब उन्होंने अपने सीनियर की किसी गलती की तरफ ध्यान दिलाया, तो उन्हें उनकी सोशल मीडिया एक्टिविटी को लेकर सुनना पड़ा. उनके मुताबिक, सीनियर ने उनसे कहा था कि वह सोशल मीडिया की दुनिया से बाहर निकलें और यह समझें कि सोशल मीडिया ही पूरी दुनिया नहीं है.
मिताली के अनुसार, उन्हें यह बात उस समय सुननी पड़ी जब वह केवल ऑफिस से जुड़ी एक गलती की ओर इशारा कर रही थीं. उन्होंने एक और घटना का जिक्र किया, जो उनकी बीमारी से जुड़ी थी. मिताली ने बताया कि चिकनपॉक्स से ठीक होने के बाद जब उन्होंने बीमारी के कारण छुट्टी ली, तो उनके मेडिकल सर्टिफिकेट पर ही सवाल उठा दिया गया.
उनके अनुसार, सीनियर ने उनसे दूरी बनाकर बात करने को कहा और यह भी पूछा कि वह पूरी तरह ठीक हुई हैं या नहीं. मिताली का दावा है कि उनके मेडिकल सर्टिफिकेट को भी फर्जी बताया गया और उनकी बीमारी पर शक किया गया. वीडियो में उन्होंने ऑफिस में जूनियर्स से निजी काम करवाने की सोच पर भी सवाल उठाया. उनका कहना था कि किसी की मदद करना अलग बात है, लेकिन सिर्फ इसलिए किसी से काम करवाना कि वह जूनियर है, सही नहीं है. दोस्ताना रिश्ते में कोई मदद मांगी जाए तो बात अलग है, लेकिन पद और सीनियरिटी के नाम पर किसी पर काम थोपना उन्हें गलत लगता है.
मिताली ने तय काम के घंटों के बाद भी कर्मचारियों से काम करवाने की उम्मीद पर भी बात की. उनके मुताबिक, अगर कोई कर्मचारी अपने निर्धारित काम के घंटे पूरे होने की बात कहता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह कामचोर है या जिम्मेदारी से भाग रहा है. उन्होंने नए कर्मचारियों से जुड़ी एक और समस्या बताई. मिताली के अनुसार, फ्रेशर्स से बिना ठीक से समझाए किसी काम को बिल्कुल सही तरीके से करने की उम्मीद की जाती है. वहीं, सवाल पूछने या गलती होने पर उन्हें डांट दिया जाता है.
मिताली ने कहा कि ये सभी चीजें उनके साथ तब हुईं, जब वह खुद कर्मचारी थीं. उनका कहना है कि जब वह कभी नियोक्ता या बॉस बनेंगी, तो अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करेंगी. उन्होंने वीडियो के साथ लिखा कि पहले बॉस बनते हैं, फिर देखते हैं! ये वीडियो एक बड़े सवाल की ओर भी ध्यान खींचता है कि क्या खराब वर्कप्लेस अनुभव आने वाली पीढ़ी को बेहतर मैनेजर बनने की सीख दे सकते हैं.
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