RBI 7 अक्टूबर को लेगा बड़ा फैसला, आपकी FD से लोन EMI तक पर होगा असर.

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने दुनिया भर के बाजारों की चिंता बढ़ा दी है. इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख का असर भी ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ रहा है.
ऐसे माहौल में भारत के सामने भी महंगाई और आर्थिक ग्रोथ के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन ग्लोबल फैक्टर्स दबावों का असर क्या RBI की ब्याज दरों के फैसले पर भी पड़ेगा? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 5 से 7 अक्टूबर में होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में रेपो रेट बढ़ाएगा या नहीं, इसपर कई रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं.
रेपो रेट पर ब्रोकरेज की राय
दरअसल, महंगे कच्चे तेल से भारत के लिए आयात लागत बढ़ सकती है, जिसका असर महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है. वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से दुनियाभर में ब्याज दरों और निवेश के माहौल पर दबाव बन सकता है. जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने अनुमान जताया है कि RBI अक्टूबर और दिसंबर में रेपो रेट में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है. इससे रेपो रेट 5.75% तक पहुंच सकता है. हालांकि, फरवरी 2027 के बाद दरों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है, क्योंकि ऊंची कीमतों का असर मांग पर पड़ सकता है और महंगाई का दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है.
इतना ही नहीं, रॉयटर्स के एक इकोनॉमिस्ट पोल के मुताबिक, 61 में से 35 अर्थशास्त्रियों यानी करीब 60% ने अनुमान जताया है कि RBI अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बेसिस प्वॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर सकता है. अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार होगा जब केंद्रीय बैंक रेपो रेट बढ़ाएगा.
रेपो रेट क्यों बढ़ा सकता है आरबीआई?
अगस्त 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) बैठक के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर बरकरार रखा है. अब अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ाने के पीछे 3 बड़े कारण माने जा रहे हैं.
महंगाई बनी बड़ी चिंता: अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई 4.82% पर पहुंच गई, जो RBI के 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रही. खाने-पीने और ऊर्जा के साथ अन्य चीजों के दाम भी बढ़ रहे हैं.
रुपया और महंगा तेल भी चुनौती: इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 6% कमजोर हुआ है. वहीं, मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है. महंगा तेल भारत में महंगाई बढ़ा सकता है.
फैसला आंकड़ों पर निर्भर: रेपो रेट बढ़ाने का अनुमान फिलहाल अर्थशास्त्रियों का है. RBI अंतिम फैसला महंगाई, आर्थिक ग्रोथ, बाजार में पैसे की उपलब्धता और ग्लोबल हालात को देखकर करेगा.
आम जनता का रेपो रेट से क्या कनेक्शन होता है?
रेपो रेट सीधे तौर पर आम आदमी से जुड़ा हुआ नहीं दिखता, लेकिन इसका असर आपकी EMI, लोन की ब्याज दर और बचत पर मिलने वाले रिटर्न तक पहुंच सकता है. RBI जब बैंकों के लिए पैसे की लागत बढ़ाता है, तो बैंक भी अपनी ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं.
लोन और EMI पर असर: रेपो रेट बढ़ने पर फ्लोटिंग रेट वाले होम, कार या पर्सनल लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है. इससे आपकी EMI बढ़ सकती है या लोन चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है.
FD और सेविंग पर फायदा भी संभव: ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक FD पर ज्यादा ब्याज देना शुरू कर सकते हैं. हालांकि, इसका असर हर बैंक और हर स्कीम में अलग-अलग होता है.
नए लोन लेने वालों पर ज्यादा असर: अगर आप घर, कार या किसी बड़े खर्च के लिए नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो ऊंची ब्याज दर का मतलब ज्यादा कुल ब्याज चुकाना हो सकता है.
महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश: महंगी ब्याज दरों से कर्ज लेना और खर्च करना कम हो सकता है. इससे अर्थव्यवस्था में मांग घटने और महंगाई को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है.
रुपये पर भी असर: ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेश और रुपये की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं. हालांकि, इसका असर कई घरेलू और ग्लोबल फैक्टर्स पर निर्भर करता है.
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