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Shimla: शिमला से 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में नजर आया स्पेस स्टेशन, लोगों में दिखा खासा उत्साह

शिमला में स्पेस स्टेशन

शिमला से अंतरिक्ष में शनिवार शाम को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन देखा गया। इसे अंतरिक्ष में 400 किलोमीटर ऊपर चमकीले तारे की तरह देखा गया। इस स्टेशन में अमेरिका और रूस के छह वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। वे माइक्रो ग्रेविटी में पानी और आग पर कई तरह के अनुसंधान कर रहे हैं। माइक्रो ग्रेविटी में अलग-अलग पदार्थों में आग पकड़ने पर शोध होंगे। यह पानी की महीन बूंदों के निर्माण, जल प्रवाह और बौछारों के दबाव पर अध्ययन करेंगे। शिमला से इसे देखे जाने का शेड्यूल नासा ने जारी किया है। 

शनिवार को इस स्पेस स्टेशन को देखने की आम लोगों और पर्यटकों में खासी उत्सुकता रही। आसमान साफ था तो इसे चमकीले तारे की तरह उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर तेजी से दौड़ते हुए देखा गया। यह छह फरवरी से नजर आ रहा है। आठ फरवरी को यह स्पेस स्टेशन सात बजकर 20 मिनट पर पश्मिोत्तर में निकलता दिखा। इसके बाद यह दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में 31 डिग्री पर छिप गया। इसमें नया एक्पेडीशन- 62 शामिल है। 

नौ फरवरी को यह स्टेशन
शिमला में स्पेस स्टेशन

छह बजकर 32 मिनट से उत्तर-पश्चिम दिखना आरंभ होगा और इसे छह मिनट तक देख सकेंगे। इसे पूर्व-दक्षिण-पूर्व में देखा जाएगा। 10 फरवरी को यह सात बजकर 24 मिनट पर दक्षिण-पश्चिम में 17 डिग्री पर दिखेगा। दो मिनट बाद दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम में अस्त होगा। 11 फरवरी को यह छह बजकर 37 मिनट पर दक्षिण-पश्चिम में 32 डिग्री पर नजर आना शुरू होगा, जिसके बाद यह दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में तीन मिनट बाद दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में अस्त होगा।   

स्पेस स्टेशन में रूस और अमेरिका के छह वैज्ञानिक 
इस दल का नेतृत्व रूस के रॉसकोसमॉस के कमांडर नेविनोमिस्क कर रहे हैं। रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस से इसमें दो अन्य फ्लाइट इंजीनियर एंद्रेई बागकिन, निकोलाई थिकॉनोव भी शामिल हैंं। नासा से फ्लाइट इंजीनियर एंड्रयू मॉरगन, क्रिस कैसिडी और महिला फ्लाइट इंजीनियर जेसिका मेयर भी इस दल में हैं।  

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