1975 यानी 49 साल पहले हुआ था आजमगढ़ की फूलमती का किडनैप, एक कुएं की याद ने फिर परिवार से मिलवाया

UP News: 8 साल की फूला देवी साल 1975 में सिर्फ 8 साल की थीं. जब उनका अपहरण कर लिया गया था. 49 सालों के अंदर दुनिया बदल गई. फूला देवी की जिंदगी भी पूरी तरह से बदल गई. मगर वह कभी भी अपने गांव और परिवार को नहीं भूल पाईं. उनके मन में अपने परिवार से मिलने की इच्छा थी. वह जानना चाहती थीं कि वह कहां की रहने वाली हैं और उसका परिवार कैसा है? मगर उन्हें सिर्फ अपने गांव का नाम और गांव में स्थित एक कुएं के बारे में पता था. लेकिन इसी गांव के नाम और कुएं की हल्की-फुल्की यादों ने अपहरण के 49 साल बाद फूला देवी को अपने परिवार से मिला दिया.
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से जो मामला सामने आया है, उसने सभी को चौंका दिया है. यहां एक महिला ने 49 साल बाद अपने परिवार को खोज निकाला और अपने परिवारजनों से मिली. परिवार के कई लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं. मगर महिला अपनी जड़ों से फिर मिलकर काफी भावुक हो गईं.
साल 1975 में मुरादाबाद से हुआ था फूलमती का अपहरण
दरअसल ये पूरी कहानी शुरू होती है साल 1975 में, जब 8 साल की एक बच्ची, जिसका नाम फूलमती था, उसका अपहरण मुरादाबाद के एक मेले से कर लिया गया था. उस दौरान पीड़िता अपनी मां के साथ मुरादाबाद के मेले में गई थी. उस दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति ने उसे टोफी का लालच दिया और उसे अपने साथ लेकर चला गया. उसने पीड़िता को कुछ दिन अपने साथ रखा और फिर उसे रामपुर के गंगवार के रहने वाले लालतापसाद के हाथों बेच दिया.
फिर पीड़िता की जिंदगी बदली और लालतापसाद ने उससे शादी कर ली. शादी के बाद दोनों के एक बेटा हुआ. आज पीड़िता के बेटे सोमपाल की उम्र 34 साल है. उम्र के इस पड़ाव पर आकर पीड़िता अपने परिवार की तलाश कर रही थी और अपनी मिट्टी को देखना चाहती थी. पीड़िता को सिर्फ अपने मामा का नाम, मामा के गांव का नाम और मामा के घर में स्थित एक कुएं की हल्की-फुल्की याद थी.
एसपी ने उठाया परिवार से मिलाने का जिम्मा
इस पूरे मामले के बारे में एसपी सिटी शैलेंद्र लाल को पता चला तो उन्होंने महिला को उसके परिवार से मिलाने का जिम्मा उठा लिया. जिले के सारे थानों में मामले की जानकारी भिजवा दी गई. एसपी के आदेश पर एक टीम भी बनाई गई. पुलिस टीम रामपुर गई और पीड़िता को आजमगढ़ लेकर आई.
याद के नाम पर सिर्फ मामा के गांव का नाम और मामा का नाम पता था
महिला ने पुलिस को बताया कि उसके मामा का नाम रामचंद्र था. वह चूटीडाढ़ गांव में रहते थे. उनके घर के आंगन में एक कुआं था. पुलिस ने जांच की तो पता चला कि अब ये गांव आजमगढ़ में नहीं बल्कि मऊ में है. यह गांव दोहरीघाट थाने के अंतर्गत आता है. पीड़िता द्वारा बताए गए पते को लेकर जब पुलिस पीड़िता के मामा के घर पहुंची तो पता चला कि उसके पिता समेत 2 मामा की मौत हो चुकी है. उसके सिर्फ 1 ही मामा जिंदा है. महिला के वहीं रामचंद्र मामा जिंदा थे, जिनका नाम पीड़िता को याद था.
मामा को भी याद थी भांजी के लापता होने की बात
महिला के मामा की उम्र भी काफी हो चुकी थी. मगर उन्हें याद था कि उनकी भांजी 49 साल पहले लापता हो गई थी. इसके बाद महिला को पुलिस ने उसके मामा और परिजनों से मिलवाया. भांजी और बेटी से मिलकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. महिला का बेटा भी अपने ननिहाल में आकर काफी खुश था. फिलहाल ये मामला चर्चाओं में बना हुआ है. लोग पुलिस की भी काफी तारीफ कर रहे हैं.
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