‘मैं एक जिंदा लाश बनकर रह गई हूं..’, 10वीं छात्रा ने दोस्तों को भेजा वॉइस मैसेज, बोली- अब जिया नहीं जाएगा

कानपुर के केंद्रीय विद्यालय अर्मापुर में पढ़ने वाली 10वीं कक्षा की छात्रा वैशाली सिंह ने, जिसने सीबीएसई बोर्ड से 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे, अपने जीवन का अंत कर लिया। छात्रा की चाहत थी कि उसके 95 प्रतिशत अंक आते। लेकिन जब वह उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकी, तो उसने गुरुवार शाम फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
छात्रा की मां काजल ने आरोप लगाया कि स्कूल में पढ़ाई का बहुत दबाव था, जिसके चलते उसकी बेटी तनाव में थी। उन्होंने कहा कि बेटी अक्सर रातभर पढ़ाई करती थी और इससे उसे मानसिक तनाव हुआ। साथ ही, मां ने कहा कि बेटी पर पढ़ाई का इतना दबाव था कि वह डरने लगी थी कि कहीं उनका पैसा बर्बाद न हो जाए।
छात्रा ने आखिरी वॉयस मैसेज में कहा- मेरे से अब जिया नहीं जाएगा
खुदकुशी से पहले, वैशाली ने अपने कुछ साथियों को एक वॉयस रिकॉर्डिंग भेजी थी, जिसमें उसने कहा, “मेरे से अब जिया नहीं जाएगा… मैं एक जिंदा लाश बनकर रह गई हूं… अब मुझे जीने की इच्छा नहीं है… मुझे बहुत डर लगता है… मां मुझ पर इतना पैसा खर्च कर रही हैं, कहीं उनका पैसा भी बर्बाद न हो जाए।”
बुधवार को परिणाम घोषित होने के बाद से ही छात्रा मनोवैज्ञानिक दबाव में थी। दोपहर 3 से 5 बजे के बीच उसकी कई बार फोन नहीं आया। जब उसकी मां प्रिंस को भेजकर उसकी खोजबीन करने गईं, तो उन्होंने बेटी का शव फंदे से लटका देखा। सूचना पर पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची।
पनकी इंस्पेक्टर मनोज सिंह भदौरिया ने बताया कि तनाव के कारण छात्रा ने आत्महत्या की। मोबाइल फोन जब्त कर उसकी जांच की जा रही है।
छात्रा के भाई प्रिंस का कहना है कि वह भी केंद्रीय विद्यालय में 11वीं का छात्र था। पिता के देहांत के बाद से उसकी पढ़ाई छोड़ दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल के कुछ टीचरों ने उसकी बहन की तुलना उससे करते हुए उत्पीड़न किया, जिससे उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ी। प्रिंस ने कहा, “बहन अक्सर कहती थी कि टीचर कह रहे थे कि मैं प्रिंस की बहन हूं, इसलिए अच्छे नंबर नहीं आएंगे।”
डॉ. धनंजय चौधरी, विभागाध्यक्ष, मानसिक रोग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने कहा, “आजकल बच्चों पर उम्मीदों का बहुत दबाव होता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों से बात करें, उनके मन की बातें समझें और उन्हें यह समझाएं कि अंक ही सब कुछ नहीं होते।”
बीडीएस छात्रा ने हॉस्टल में दी जान
वहीं, कानपुर के ही कल्याणपुर में गूबा गार्डेन स्थित एक हॉस्टल में रह रही 23 वर्षीय बीडीएस छात्रा नाजिया हसन ने बुधवार रात फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। वह मूल रूप से बिहार के मुंगेर की रहने वाली थी।
पिता, जो बिहार से आए थे, बोले, “हमने तो बेटी के क्लीनिक के लिए जमीन भी खरीद ली थी, लेकिन उसने ऐसा क्यों किया, यह समझ में नहीं आ रहा।”
पुलिस के अनुसार, नाजिया मंधना स्थित महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में तीसरे साल की छात्रा थी। उसकी सेमेस्टर की परीक्षा आने वाली थी। घटना के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं है, न ही कोई सुसाइड नोट मिला है।
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