इंस्टाग्राम पर रहमान बनकर आशीष ने किया निकाह, ढाई साल बाद खुला राज और अब 4 माह के बेटे को लेकर हुआ फरार

बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से ‘लव जिहाद’ के उलट एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा और सोशल मीडिया पर दोस्ती को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक हिंदू युवक ने इंस्टाग्राम पर मुस्लिम पहचान बताकर युवती को प्रेम जाल में फंसाया, निकाह किया और अब ढाई साल बाद राज खुलने पर वह अपने 4 माह के मासूम बेटे को लेकर चंपत हो गया है। पीड़िता फात्मा अब अपने कलेजे के टुकड़े के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है।
इंस्टा पर दोस्ती और लखनऊ में निकाह: ‘रहमान’ की हकीकत ने उड़ाए होश
मामला मऊ जनपद की रहने वाली फात्मा और बरेली के सरदार नगर निवासी आशीष गंगवार का है। आरोप है कि आशीष ने इंस्टाग्राम पर अपनी पहचान छिपाकर खुद को ‘रहमान’ बताया था। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदली और करीब ढाई साल पहले दोनों ने लखनऊ में निकाह कर लिया। निकाह के बाद दोनों उत्तराखंड के रुद्रपुर में रहने लगे। फात्मा को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि जिसे वह रहमान समझकर सात जन्मों का साथी मान रही है, उसकी असल पहचान कुछ और ही है।
पिता की मौत के बाद गांव पहुंचे, तो खुली पोल; शुरू हुआ प्रताड़ना का दौर
फात्मा की दुनिया तब उजड़ गई जब आशीष के पिता की मौत के बाद वह उसके पैतृक गांव सरदार नगर पहुंची। वहां उसे पता चला कि उसके पति का नाम रहमान नहीं बल्कि आशीष गंगवार है। अपनी असली पहचान और मजहब छिपाने की बात सामने आने पर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि आशीष उसे रुद्रपुर में अकेला छोड़कर गांव भाग आया। फात्मा ने हिम्मत नहीं हारी और नवाबगंज कोतवाली पहुंचकर पुलिस की मदद ली।
बरेली जंक्शन पर रची साजिश: मोबाइल छोड़ा और बच्चे संग हो गया गायब
पुलिस के हस्तक्षेप के बाद आशीष ने फात्मा को झांसा दिया कि वह दिल्ली में साथ रहेंगे और उनका 4 माह का बेटा उसकी बहन के पास बरेली में सुरक्षित है। आरोप है कि आशीष अपने दोस्त कपिल के साथ फात्मा को बरेली रेलवे जंक्शन ले आया। वहां फात्मा को एक जगह बैठाकर वह मोबाइल वहीं छोड़कर बच्चे समेत रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। घंटों इंतजार के बाद जब वह नहीं लौटा, तो फात्मा को एहसास हुआ कि वह एक बार फिर गहरी साजिश का शिकार हो गई है।
वीआईपी ड्यूटी में उलझी पुलिस, ससुराल की गलियों में भटक रही मां
अपने मासूम बच्चे के लिए बिलख रही फात्मा दोबारा नवाबगंज कोतवाली पहुंची, लेकिन आरोप है कि पुलिस वीआईपी ड्यूटी का हवाला देकर टालमटोल करती रही। मजबूरन पीड़िता को अपने ससुराल के पड़ोसियों के यहाँ रात गुजारनी पड़ी। मऊ से आई फात्मा अब पूरी तरह असहाय है और पुलिस प्रशासन से गुहार लगा रही है कि उसके 4 माह के बेटे को आशीष के चंगुल से छुड़ाया जाए। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है, लेकिन अब तक पिता-पुत्र का कोई सुराग नहीं मिला है।
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