“क्या तुम लड़की हो या लड़का?” — हरमनप्रीत कौर की कहानी का वो पल जिसने सब बदल दिया.

मोगा (पंजाब) : वर्ल्ड कप जीतने वाली कप्तान बनने से लेकर महिला क्रिकेट के सबसे बेखौफ खिलाड़ियों में शामिल होने तक, हरमनप्रीत कौर का सफर पंजाब के छोटे से शहर मोगा से शुरू हुआ। उस समय लड़कियों के लिए क्रिकेट में ज़्यादा मौके नहीं थे, इसलिए उन्होंने स्थानीय मैदानों पर लड़कों के साथ खेलकर अपने खेल को निखारा। इसी अनुभव ने उन्हें शुरुआत से ही एक मजबूत और निडर खिलाड़ी बना दिया। परिवार, खासकर उनके पिता का पूरा समर्थन, उनके इस सफर की मजबूत नींव बना।
हाल ही में iQOO Quest Talk पॉडकास्ट में निपुण मार्या के साथ बातचीत में हरमनप्रीत ने अपने शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा क्रिकेट खेलना चाहती थी। मेरे कमरे में वीरेंद्र सहवाग का पोस्टर था और मैं उनके खेल से प्रभावित थी।। मेरे पिता भी खेल से जुड़े रहे हैं, इसलिए खेल हमारे परिवार का हिस्सा था।”
उनके पिता हरमंदर सिंह भुल्लर, जो पहले वॉलीबॉल और बास्केटबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं, उनके पहले कोच और सबसे बड़े सपोर्ट सिस्टम बने। हरमनप्रीत ने कहा, “वो मुझे मैदान ले जाते थे और कभी खेलने से नहीं रोका। मैं जो करना चाहती थी, उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया। उस समय मोगा में लड़कियाँ क्रिकेट नहीं खेलती थीं, इसलिए मैं लड़कों के साथ ही खेलती रही। वहीं से मैंने सीखा और खुद को बेहतर बनाया।”
मैदान पर घटी एक घटना ने उनके सफर को नई दिशा दे दी। उन्होंने बताया, “मैंने अपने बाल वैसे बांधे हुए थे जैसे सिख लड़के बांधते हैं। जब एक स्कूल के प्रिंसिपल ने मुझे खेलते देखा, तो वो यह समझ नहीं पाए कि मैं लड़की हूँ या लड़का। वो पास आकर मुझे देखने लगे और तभी उन्हें लगा कि मुझमें कुछ खास है।”
इसके बाद उनके सफर में एक बड़ा मोड़ आया। “उन्होंने मेरे पिता से कहा, ‘इसमें प्रतिभा है। इसे मेरे स्कूल में लेकर आइए, मैं इसे महिला क्रिकेट के लिए सही ट्रेनिंग दूंगा।’” ज्ञान ज्योति स्कूल अकादमी ने उनके क्रिकेट करियर में औपचारिक प्रशिक्षण की शुरुआत की। इससे पहले वह सिर्फ लड़कों के साथ मैदान में खेलती थीं, लेकिन यहीं पहली बार उन्हें सही और व्यवस्थित कोचिंग मिली। इसी के साथ उन्होंने क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू किया।
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