Recent Posts

Breaking News

ओपिनियन पोल के नतीजों ने बढ़ाई सियासी तपिश, ममता की राह में रोड़ा बनी बीजेपी, कांटे की टक्कर!

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने ही वाला है, लेकिन उससे पहले आए ताजा ओपिनियन पोल ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) फिलहाल बढ़त बनाए हुए जरूर दिख रही है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) बेहद आक्रामक अंदाज में सत्ता की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। आंकड़ों का गणित साफ इशारा कर रहा है कि बंगाल की सत्ता का संग्राम इस बार ‘एक-एक वोट’ की जंग होने वाला है।

वोट शेयर का गणित: महज 4% का फासला

ओपिनियन पोल के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस को राज्य में 43.7 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, बीजेपी 39.7 प्रतिशत वोट शेयर के साथ टीएमसी के गले तक पहुंच गई है। सीटों के समीकरण को देखें तो टीएमसी गठबंधन को 159 से 169 सीटें मिलने की उम्मीद है, जो बहुमत के आंकड़े को पार कर रही है। दूसरी ओर, बीजेपी गठबंधन भी 120 से 130 सीटें जीतकर मजबूत विपक्ष या सत्ता के दावेदार के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बीजेपी अपने वोट शेयर में सिर्फ 5 फीसदी का इजाफा और कर लेती है, तो बंगाल के सत्ता शिखर पर भगवा लहरा सकता है।

चेहरे की जंग: दीदी बनाम दादा

मुख्यमंत्री पद की लोकप्रियता के मामले में ममता बनर्जी अभी भी बंगाल की पहली पसंद बनी हुई हैं, जिन्हें 44.4 प्रतिशत जनता का समर्थन हासिल है। हालांकि, बीजेपी के कद्दावर नेता और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी 38.3 प्रतिशत के साथ उन्हें सीधी टक्कर दे रहे हैं। अन्य चेहरों की बात करें तो कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी (3.6%) और सीपीएम के मोहम्मद सलीम (4.2%) काफी पीछे छूट गए हैं, जिससे यह साफ है कि बंगाल में अब सीधा मुकाबला ‘दो ध्रुवीय’ हो चुका है।

क्या हैं बंगाल के बड़े मुद्दे?

राज्य सरकार के कामकाज को लेकर जनता की राय काफी बंटी हुई नजर आ रही है। सर्वे में शामिल 31.1 प्रतिशत लोगों ने सरकार के काम को ‘बहुत अच्छा’ बताया, तो वहीं 26.2 प्रतिशत लोगों ने इसे ‘बहुत खराब’ करार दिया। चुनाव में सबसे बड़े मुद्दों की बात करें तो:

  • रोजगार और विकास: 36.6 प्रतिशत लोगों के लिए यह सबसे बड़ी चिंता है।
  • कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा: 17.6 प्रतिशत जनता इसे अहम मानती है।
  • महंगाई: यह मुद्दा भी मतदाताओं के दिमाग में गहराई तक बैठा है।

मुस्लिम वोटों का समीकरण और ध्रुवीकरण

सर्वे में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) की मौजूदगी पर भी सवाल पूछे गए। करीब 46.5 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यदि मुस्लिम वोटों का बंटवारा होता है, तो इसका सीधा चुनावी फायदा बीजेपी को मिल सकता है। ध्रुवीकरण के इस खेल में कौन बाजी मारेगा, यह तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे, लेकिन फिलहाल बंगाल का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है।

No comments