ऑफिस विवाद में ‘F*** Off’ कहना यौन उत्पीड़न नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला

- यौन मंशा न होने पर IPC 354A लागू नहीं, डायरेक्टर के खिलाफ FIR रद्द
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कार्यस्थल पर विवाद के दौरान किसी कर्मचारी द्वारा “F*** Off” जैसे अपशब्द का प्रयोग, अपने आप में यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं आता, जब तक उसमें यौन मंशा या संकेत स्पष्ट रूप से मौजूद न हों।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस कीर्ति सिंह ने कहा कि कार्यस्थल पर शिष्टाचार बनाए रखना जरूरी है, लेकिन हर अभद्र टिप्पणी को यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IPC की धारा 354A तभी लागू होगी जब आरोप में यौन प्रकृति का तत्व मौजूद हो।
मामला कैसे शुरू हुआ
यह मामला गुरुग्राम की एक निजी कंपनी से जुड़ा है, जहां एक महिला बिजनेस मैनेजर ने अक्टूबर 2018 में मेडिकल लीव मांगी थी।
इसी दौरान कंपनी के डायरेक्टर और कर्मचारी के बीच ईमेल के जरिए बहस हुई, जिसमें कथित तौर पर “F*** Off” जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ।
इस्तीफा और बाद का विवाद
घटना के बाद शिकायतकर्ता ने उसी दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे कंपनी ने स्वीकार कर लिया। हालांकि, बाद में नोटिस पीरियड, वेतन और अनुबंध के उल्लंघन को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और कानूनी नोटिस का आदान-प्रदान हुआ।
चार महीने बाद दर्ज हुई FIR
करीब चार महीने बाद शिकायतकर्ता ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए डायरेक्टर के खिलाफ FIR दर्ज कराई। मामले में देरी और पहले से चल रहे कॉन्ट्रैक्ट विवाद को भी कोर्ट ने ध्यान में लिया।
FIR रद्द करने का आदेश
कोर्ट ने पाया कि मामले में यौन उत्पीड़न का मूल तत्व मौजूद नहीं है और इसे कानूनी विवाद के रूप में इस्तेमाल किया गया है। इसी आधार पर अदालत ने डायरेक्टर के खिलाफ दर्ज FIR और सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।
साथ ही आर्थिक शर्त भी लगाई
हालांकि FIR रद्द करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एक महीने के भीतर चंडीगढ़ स्थित PGIMER चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में 20,000 रुपये जमा करने का निर्देश दिया।
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