75 साल बाद श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती पर खिला कमल, BJP ने चुकाया पितामह का पितृऋण.

कोलकाता : पश्चिम बंगाल की सियासत ने आज एक नया और स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। जनसंघ के संस्थापक और भाजपा के ‘पितामह’ कहे जाने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मभूमि पर साढ़े सात दशकों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार ‘कमल’ खिल गया है। हुगली की लहरों से लेकर दार्जिलिंग की वादियों तक आज ‘जय श्री राम’ के नारों की गूंज है, जो बंगाल के बदलते सियासी मिजाज की तस्दीक कर रही है। भाजपा के लिए यह केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि उस वैचारिक ऋण की अदायगी है, जो डॉ. मुखर्जी के प्रति पार्टी के हर कार्यकर्ता पर बकाया था।
प्रचंड बहुमत: 190 पार पहुंची भाजपा, ममता के ‘मां-माटी-मानुष’ का ढलान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता ने ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के नैरेटिव को पूरी तरह गले लगा लिया है। रुझानों और नतीजों में भाजपा 190 से ज्यादा सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ रही है। वहीं, पिछले 15 सालों से सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) 100 सीटों के नीचे सिमटती नजर आ रही है। यह जीत साबित करती है कि पीएम मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र ने बंगाल के मध्यम वर्ग और ग्रामीण आबादी के दिल में जगह बना ली है।
पितृऋण की अदायगी: कश्मीर के बाद अब बंगाल फतह
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नारा दिया था एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।” केंद्र सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उनके संकल्प का एक हिस्सा पूरा किया था, लेकिन उनकी अपनी जन्मभूमि बंगाल में भाजपा की सरकार न होना एक अधूरा सपना था। आज 2026 के नतीजों ने उस वैचारिक चक्र को पूरा कर दिया है। भाजपा ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘कर्तव्य पथ’ पर चलते हुए यूपी और उत्तराखंड में तो सरकारें बनाईं, लेकिन बंगाल की जीत पार्टी के लिए भावनात्मक रूप से सबसे बड़ी उपलब्धि है।
इतिहास की विडंबना का अंत: ‘बाहरी’ का ठप्पा हुआ साफ
1901 में कोलकाता के एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में जन्मे डॉ. मुखर्जी ने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी। विडंबना यह थी कि जिस पार्टी का जन्म बंगाल की कोख से हुआ, उसे ही दशकों तक अपनी जमीन पर ‘बाहरी’ कहा गया। लेफ्ट के 34 साल और टीएमसी के 15 सालों के सियासी वनवास को खत्म करते हुए भाजपा ने साबित कर दिया कि वह ‘बाहरी’ नहीं, बल्कि बंगाल की असली ‘मिट्टी की पार्टी’ है। पार्टी ने इस चुनाव को ‘अंतिम युद्ध’ की तरह लड़ा और बूथ स्तर तक अपनी पैठ मजबूत की।
घुसपैठ पर प्रहार और बंग-संस्कृति का पुनरुद्धार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनते ही बंगाल की विरासत को पुनर्जीवित किया जाएगा। अमित शाह के उस बयान की आज खूब चर्चा हो रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार बंगाल से घुसपैठ को पूरी तरह समाप्त कर देगी और “परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा।” भाजपा अब बंगाल को एक मजबूत राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने और घुसपैठियों को बाहर निकालने के अपने वादे पर आगे बढ़ने को तैयार है।
हेस्टिंग्स मुख्यालय में उड़ा गुलाल, तृप्त हुई पितामह की आत्मा
कोलकाता स्थित भाजपा मुख्यालय ‘हेस्टिंग्स’ में आज जश्न का माहौल है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह जीत डॉ. मुखर्जी के उस विजन की जीत है, जिसमें उन्होंने एक अखंड और समृद्ध भारत की कल्पना की थी। पहली बार बंगाल विधानसभा में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ‘कमल’ का कोई सिपाही बैठेगा। आज निश्चित रूप से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा संतुष्ट होगी कि उनके बंगाल ने आखिरकार उनके वैचारिक वंशजों को सत्ता की कमान सौंप दी है।
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