बंगाल में EVM स्ट्रॉन्गरूम खोलने पर एक्शन : चुनाव आयोग ने 6 अधिकारियों को निलंबित किया, बीजेपी नेता ने की थी शिकायत

West Bengal Assembly Election Results 2026 : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस मामले में निर्वाचन आयोग ने सख्त कार्रवाई करते हुए छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई बीजेपी नेता की शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्ट्रॉन्ग रूम को कई बार खोला गया।
जानकारी के अनुसार, दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर क्षेत्र में ईवीएम रखे गए स्ट्रॉन्ग रूम को कथित तौर पर करीब 10 बार खोला गया। इस पर आपत्ति जताते हुए भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। शिकायत के बाद आयोग ने मामले की जांच कर तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया।
इस बीच, राज्य में चुनावी माहौल अभी भी गर्म है। दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान के दौरान मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं। हरिदेवपुर प्राथमिक विद्यालय स्थित बूथ संख्या 194 पर सुबह से ही बड़ी संख्या में मतदाता पहुंचे। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने पुनर्मतदान के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इसे और अधिक बूथों पर लागू किया जाना चाहिए था। उन्होंने डायमंड हार्बर और फाल्टा क्षेत्र के अन्य मतदान केंद्रों पर भी पुनर्मतदान की मांग उठाई।
राज्य में दो विधानसभा सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला पिछली वोटिंग के दौरान सामने आई अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर लिया गया है। मतदान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न कराया जा रहा है।
इधर, तृणमूल कांग्रेस ने भी ईवीएम सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। पार्टी ने स्ट्रॉन्ग रूम में रखी सीलबंद ईवीएम की 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी की मांग की है। टीएमसी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल से मुलाकात कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की।
मामला न्यायालय तक भी पहुंच गया है। उच्चतम न्यायालय तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें मतगणना में केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश को चुनौती दी गई है। इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के फैसले को वैध ठहराते हुए टीएमसी की याचिका खारिज कर दी थी।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में संपन्न हुआ था। अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।
चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जबकि राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।
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