सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया अदालतों में AI के इस्तेमाल का पहला ड्राफ्ट; इंसानी विवेक ही रहेगा सर्वोपरि, न्यायाधीश ही लेंगे अंतिम फैसला

नई दिल्ली : तकनीक के तेजी से बदलते दौर में अब भारतीय न्याय व्यवस्था भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में AI के इस्तेमाल को लेकर वर्ष 2026 का पहला आधिकारिक ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किया है। इस मसौदे पर आम जनता, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
ड्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय नियंत्रण, जवाबदेही, डेटा सुरक्षा और न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखना है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तकनीक न्यायिक कार्यों में सहयोगी की भूमिका निभाएगी, लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल न्यायाधीशों के पास ही रहेगा।
मसौदे के अनुसार, किसी भी AI प्रणाली का उपयोग पूरी तरह मानवीय निगरानी और नियंत्रण के अधीन होगा। अदालतों में AI का इस्तेमाल कानूनी शोध, दस्तावेजों की खोज, केस मैनेजमेंट और प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन यह किसी भी स्थिति में न्यायाधीश की भूमिका नहीं निभा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने उन आशंकाओं को भी खारिज किया है जिनमें भविष्य में AI द्वारा स्वतः फैसले सुनाने की संभावना जताई जा रही थी। ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि कोई भी AI सिस्टम किसी मामले में स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले सकता, न ही किसी आरोपी को दोषी ठहरा सकता है या सजा सुना सकता है। कानून, तथ्यों और न्याय से जुड़े मामलों में अंतिम और पूर्ण अधिकार न्यायाधीशों के पास ही सुरक्षित रहेगा।
कोर्ट का मानना है कि न्याय केवल तथ्यों और आंकड़ों का विश्लेषण भर नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय संवेदनाएं, विवेक, अनुभव और परिस्थितियों की समझ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में किसी तकनीकी त्रुटि, एल्गोरिदम की कमी या डेटा पूर्वाग्रह के कारण न्याय प्रभावित न हो, इसके लिए मानव हस्तक्षेप को अनिवार्य रखा गया है।
यह ड्राफ्ट रेगुलेशन न्यायपालिका में तकनीक और मानवीय निर्णय के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य अदालतों की कार्यक्षमता बढ़ाना है, जबकि न्याय की मूल भावना और स्वतंत्रता को पूरी तरह सुरक्षित रखना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI अदालतों के कामकाज को अधिक तेज, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन न्याय की अंतिम कसौटी पर इंसानी विवेक और संवेदनशीलता ही सर्वोपरि रहेगी।
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