उनके बिना जीना नामुमकिन था…पत्नी और बेटे की कब्र के बीच थम गईं सुभान की सांसें, आखिरी शब्द थे- फातिहा पढ़ आता हूं

Harpalpur, Mahoba : कहते हैं मोहब्बत की दास्तानें किताबों में मिलती हैं, लेकिन महोबा के चरखारी में इश्क और जुदाई का एक ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसने सुनने वालों का कलेजा कंपा दिया। जिसे जिंदा रहने के लिए कदम-कदम पर हमसफर के सहारे की जरूरत थी, उसने हमसफर के बिछड़ने के बाद मौत की आगोश में सोने के लिए खुद ही कब्र का रास्ता चुन लिया। 11 दिन पहले उजड़े हंसते-खेलते परिवार की बची-कुची कड़ियां भी शुक्रवार को हमेशा के लिए टूट गईं। कैंसर से जूझ रहे सुभान अहमद का शव उनकी पत्नी और मासूम बेटे की कब्र के ठीक बीच में पड़ा मिला।
जब तक रजिया जिंदा थी, सुभान चल भी नहीं पाते थे, जुदाई ने पैरों को दे दी ताकत
मृतक सुभान अहमद 40 मूल रूप से छतरपुर जिले के हरपालपुर के रहने वाले थे। वह खतरनाक कैंसर बीमारी से पीड़ित थे। उनके साले सलीम ने रुंधे गले से बताया कि जब तक सुभान की पत्नी रजिया खातून जिंदा थी, सुभान अपने पैरों पर खड़े भी नहीं हो पाते थे। उठने-बैठने, नहाने और खाने तक के लिए रजिया ही उनका एकमात्र सहारा थी। लेकिन 11 दिन पहले नियति ने ऐसा क्रूर मजाक किया कि रजिया का साथ छूट गया। हैरानी की बात यह है कि जो सुभान रजिया के बिना एक कदम नहीं चल पाते थे, पत्नी की मौत के बाद वे बिना किसी सहारे के खड़े होने लगे और रोज चुपचाप कब्रिस्तान की तरफ निकल जाते थे।
25 मई की वो काली रात, जिसने छीन लीं दो खुशियां
यह गमगीन दास्तान 25 मई से शुरू हुई थी। सुभान के 6 वर्षीय मासूम बेटे हसनैन को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत हुई और चंद घंटों में उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत का सदमा मां रजिया बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने भी दम तोड़ दिया। एक ही दिन में पत्नी और बेटे को खोने के बाद सुभान पूरी तरह टूट चुके थे। दोनों का अंतिम संस्कार कस्बा चरखारी में ईदगाह के पास स्थित कब्रिस्तान में किया गया था। इसके बाद से सुभान अपने तीन अनाथ बच्चों सैफ, रोशनी और आलिया के साथ अपनी ससुराल चरखारी में ही रह रहे थे।
आखिरी शब्द: ‘फातिहा पढ़ने जा रहा हूं’ और फिर लौटकर नहीं आए
परिजनों के मुताबिक, सुभान हर रोज सुबह उठकर पत्नी और बेटे की कब्र पर जाते थे। शुक्रवार की सुबह करीब चार बजे भी वह यह कहकर घर से निकले कि ‘फातिहा पढ़ आता हूं।’ ससुराल वालों को लगा कि वह रोज की तरह एक-दो घंटे में लौट आएंगे। लेकिन जब धूप तेज होने के बाद भी सुभान घर नहीं लौटे, तो परिजनों के दिल में किसी अनहोनी की आशंका बैठ गई।
एक हाथ पत्नी तो दूसरा हाथ बेटे की कब्र पर… देखकर रो पड़ा पूरा कब्रिस्तान
जब परिजन ढूंढते हुए ईदगाह के पास कब्रिस्तान पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर सबकी चीख निकल गई। सुभान का बेजान शरीर उनकी पत्नी रजिया और बेटे हसनैन की कब्र के बिल्कुल बीच में पड़ा था। उनका एक हाथ पत्नी की कब्र को छू रहा था और दूसरा हाथ बेटे की कब्र पर था। मानो वह मौत के बाद भी अपने परिवार को गले लगा रहे हों। परिजन उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पैर पर कीड़े के काटने का निशान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह साफ नहीं
मृतक के साले सलीम ने बताया कि सुभान के पैर में किसी जहरीले कीड़े या सांप के काटने का निशान था। शक होने पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट में मौत का कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। शनिवार को गमगीन माहौल में सुभान अहमद को भी उसी कब्रिस्तान में उनकी पत्नी की कब्र के ठीक पास सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
11 दिनों में अनाथ हो गए तीन मासूम, ननिहाल के कंधों पर आया जिम्मेदारी का बोझ
इस दर्दनाक त्रिपक्षीय मौत के बाद सुभान के तीन बच्चे सैफ, रोशनी और आलिया महज 11 दिनों के भीतर पूरी तरह अनाथ हो गए। सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ जाने के बाद इन मासूमों का रो-रोकर बुरा हाल है। अब इन तीनों बच्चों के पालन-पोषण और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उनके ननिहाल पक्ष (मामा सलीम और अन्य रिश्तेदारों) के कंधों पर आ गई है। पूरे इलाके में इस घटना को लेकर शोक की लहर है।
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