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महंगाई की मार: एलपीजी के बाद अब दूध-सब्जी और एफएमसीजी उत्पाद भी हुए महंगे, आम आदमी का बजट बिगड़ा


New Delhi :
आम जनता को महंगाई के मोर्चे पर एक के बाद एक लगातार झटके लग रहे हैं। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब रसोई का बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है। ईंधन के दामों में आग लगने का असर अब सीधा आपकी थाली और रोजमर्रा की चीजों पर पड़ने लगा है। खाद्य पदार्थों से लेकर दैनिक उपयोग की वस्तुओं तक के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम परिवारों की कमर टूट गई है।

ईंधन के बढ़ते दाम और बिगड़ती सप्लाई चेन

विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी ने परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत को काफी बढ़ा दिया है। माल ढुलाई महंगी होने के कारण सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है, जिसका सीधा नतीजा यह है कि बाजार में लगभग हर उत्पाद महंगा हो गया है। इसी कड़ी में दूध उत्पादकों पर भी मार पड़ी है। पशु चारे, पैकेजिंग और ईंधन की बढ़ती कीमतों के चलते कई प्रमुख डेयरी कंपनियों ने दूध के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा कर दिया है।

थाली का खर्च 30 फीसदी तक बढ़ा

महंगाई का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि दालों, खाद्य तेल और सब्जियों के भाव भी तेजी से ऊपर चढ़े हैं। बाजार विशेषज्ञों का आकलन है कि बीते कुछ महीनों में एक आम भारतीय परिवार की थाली का खर्च करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। वहीं, एफएमसीजी सेक्टर की कंपनियों ने भी उत्पादन लागत में बढ़ोत्तरी का हवाला देते हुए अपने साबुन, डिटर्जेंट और अन्य उपभोक्ता उत्पादों की कीमतों में 2 से 14 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है।

क्रिसिल की चेतावनी: और बढ़ सकती है मुश्किलें

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बड़ी चेतावनी दी है। एजेंसी का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दाम और भी बढ़ सकते हैं। यह न केवल खाद्य पदार्थों को और महंगा करेगा, बल्कि कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, सिरेमिक और निर्माण सामग्री जैसी चीजों की कीमतों पर भी अतिरिक्त दबाव डालेगा।

सरकार ने दी राहत, लेकिन चुनौतियां बरकरार

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो घरेलू एलपीजी पर तेल कंपनियों की ‘अंडर-रिकवरी’ वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक 60,000 करोड़ रुपये के स्तर को छू गई है, जो पिछले साल के 41,338 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है। स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने को मंजूरी दी है। हालांकि, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी जारी रहेगी, जिससे देश के 10.58 करोड़ से अधिक परिवारों को थोड़ी राहत मिलेगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि उत्पादन लागत बढ़ने से अर्थव्यवस्था में महंगाई का चक्र तेजी से घूम रहा है, जिसके चलते आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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